होर्मुज़ स्ट्रेट में युद्ध के बाद कैसे हैं हालात? जानिए कितनी सामान्य हुई लोगों की जिंदगी

ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग माना जाता है। यही वह रास्ता है जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने इस पूरे इलाके को युद्ध के केंद्र में ला दिया था। अब संघर्षविराम लागू होने के बाद यहां जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, लेकिन युद्ध के निशान आज भी साफ दिखाई देते हैं।
ब्रिटिश पत्रकारों को संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार होर्मुज़ स्ट्रेट के ईरानी हिस्से का दौरा करने का मौका मिला। उनकी रिपोर्ट बताती है कि समुद्र फिर से शांत जरूर दिख रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में युद्ध का डर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
बंदरगाह पर लौटे मछुआरे, लेकिन डर अब भी कायम
भीषण गर्मी के बीच बंदर अब्बास के बंदरगाह पर मछुआरे एक बार फिर अपने जाल समेटते दिखाई दे रहे हैं। कोई बेबी शार्क पकड़कर गर्व से दिखा रहा है तो कोई मोटरसाइकिल पर बड़ी मछलियां लादकर बाजार की ओर निकल रहा है।
स्थानीय मछुआरों का कहना है कि युद्ध के दौरान समुद्र में जाना जान जोखिम में डालने जैसा था। कई महीनों तक उन्होंने मछली पकड़ना बंद रखा, क्योंकि किसी भी समय गोलीबारी या सैन्य कार्रवाई का खतरा बना रहता था।
अब संघर्षविराम के बाद वे फिर समुद्र में लौटे हैं, लेकिन हर दिन अनिश्चितता बनी रहती है कि हालात दोबारा बिगड़ सकते हैं।
क्यों इतना अहम है होर्मुज़ स्ट्रेट?
होर्मुज़ स्ट्रेट को दुनिया की “ऑयल लाइफलाइन” कहा जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
शांतिकाल में दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यहां आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, पेट्रोल-डीजल के दाम और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।
इसी रणनीतिक महत्व के कारण यह इलाका वर्षों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सैन्य तनाव का केंद्र बना हुआ है।
कैसे बढ़ा था संघर्ष?
28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले शुरू किए। इसके जवाब में ईरान ने इसराइल और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
इसी दौरान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बिना अनुमति गुजरने वाले कुछ व्यावसायिक जहाजों पर कार्रवाई शुरू कर दी। इससे होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध और सैन्य दबाव बढ़ाया। परिणामस्वरूप दुनिया भर के कई मालवाहक जहाज समुद्र में फंस गए और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
संघर्षविराम के बाद भी पूरी तरह सामान्य नहीं हालात
हालांकि संघर्षविराम के बाद ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को आंशिक रूप से खोल दिया है, लेकिन समुद्री यातायात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र में कई बड़े कंटेनर जहाज अब भी ईरानी अधिकारियों की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। संघर्ष के दौरान कब्जे में लिए गए कुछ जहाजों को भी अभी तक रिहा नहीं किया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस समुद्री मार्ग को अभी भी रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
बंदर अब्बास में लौट रही बाजारों की रौनक
बंदर अब्बास शहर में अब बाजार फिर से खुल चुके हैं। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है और लोग धीरे-धीरे अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
यह शहर सदियों से समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां ताजा मछलियों से लेकर खजूर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, इत्र और पारंपरिक वस्त्रों तक का बड़ा कारोबार होता है।
युद्ध के दौरान कारोबार लगभग ठप हो गया था, लेकिन अब व्यापारियों को उम्मीद है कि हालात और बेहतर होंगे।
युद्ध के निशान अब भी मौजूद
हालांकि सामान्य होती जिंदगी के बीच युद्ध के जख्म अभी भी दिखाई देते हैं। बंदर अब्बास के एक रिहायशी इलाके में स्थित बहुमंजिला इमारत मार्च में हुए हवाई हमले में बुरी तरह तबाह हो गई थी। इमारत का आधा हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका है, जबकि बाकी हिस्सा अभी भी खड़ा है।
स्थानीय कारोबारी फातिमा बताती हैं कि इस इमारत में कई परिवार रहते थे। हमले के दौरान कुछ लोगों की मौत हुई जबकि कई घायल हुए। उनका कहना है कि यह कोई सैन्य ठिकाना नहीं था, फिर भी हमला हुआ।
आम लोगों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा। कई लोगों की नौकरियां चली गईं, कारोबार ठप हो गया और परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े।
स्थानीय महिला फातेमेह बताती हैं कि उनके बेटे की नौकरी युद्ध के दौरान चली गई। अब पूरा परिवार उनकी छोटी दुकान से होने वाली कमाई पर निर्भर है।
वहीं एक अन्य महिला मासूमेह कहती हैं कि हर युद्ध आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना देता है। इसका असर केवल अर्थव्यवस्था पर नहीं बल्कि मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है।
ईरान के लिए रणनीतिक हथियार बना हुआ है होर्मुज़
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट केवल व्यापारिक मार्ग नहीं बल्कि ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत भी है।
यदि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ता है तो यह समुद्री मार्ग फिर वैश्विक चिंता का विषय बन सकता है। ईरान पहले भी संकेत दे चुका है कि जरूरत पड़ने पर वह इस मार्ग पर नियंत्रण का इस्तेमाल रणनीतिक दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
क्या पूरी तरह खत्म हो गया है खतरा?
हालांकि फिलहाल संघर्षविराम लागू है और समुद्र में सामान्य गतिविधियां लौट रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि हालात अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत का भविष्य इस पूरे क्षेत्र की स्थिरता तय करेगा। यदि दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता नहीं होता तो होर्मुज़ स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
आज बंदर अब्बास के बाजारों में फिर रौनक है, मछुआरे समुद्र में लौट आए हैं और जहाज धीरे-धीरे अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन स्थानीय लोगों के लिए युद्ध केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति नहीं, बल्कि रोजी-रोटी, सुरक्षा और परिवार की चिंता का सवाल है।
युद्ध के जख्म अभी पूरी तरह भरे नहीं हैं। लोगों को उम्मीद है कि मौजूदा संघर्षविराम लंबे समय तक कायम रहेगा और दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में से एक होर्मुज़ स्ट्रेट फिर कभी युद्ध का मैदान नहीं बनेगा।



