श्रद्धांजलि : बशीर बद्र-एक शायर जो ज़िंदगी को शेर बना गया

जब बशीर बद्र के शेर पहली  बार कानों में गूंजे, तो ऐसा लगा जैसे कोई साधारण इंसान, बिना किसी दिखावे के, बिना किसी ताज-तख्त के, अपनी ज़िंदगी के हर पल को शब्दों के दीपक में जला रहा हो, और वह दीपक कभी बुझे नहीं, बल्कि हर नए शेर के साथ और भी तेज़ी से जलता चला गया, इसलिए कि बशीर बद्र सिर्फ़ एक शायर नहीं थे, बल्कि वह आम आदमी की आवाज़ थे, उस आवाज़ जो चौक-चौबारे पर, बाज़ारों में, रेलगाड़ियों की छत पर, और रात भर जागते हुए कमरों में गूंजती है, वह आवाज़ जो कभी शोर मचाती नहीं, बस धीरे-धीरे, धैर्य से, अपने शेरों के ज़रिए इंसानों के दिलों में उतर जाती है, और वही बशीर बद्र थे जो अपनी सरलता में इतने गहरे थे कि उनके शेर सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई अपने दिल की  बात कह रहा हो, कोई अपने ही ज़ख्मों को शब्द दे रहा हो, कोई अपने ही दुखों को रोशनी में बदल रहा हो।

डॉ बशीर बद्र मूल रुप से अयोध्या के रहने वाले थे लेकिन उनकी पढ़ाई लिखाई इटावा और अलीगढ़ में हुई. नौकरी मेरठ में की और उसके भोपाल में बस गए. उनकी प्रसिद्धि का पहला शेर था,

‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो ना जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए”…

उनकी ज़िंदगी के किस्से भी उतने ही सरल और उतने ही गहरे हैं जितने उनके शेर, और जब लोग उनके बारे में बात करते हैं तो एक किस्सा ख़ास तौर पर याद आता है, वह किस्सा जब वह मुशायरों में जाते थे, भीड़ उनके इंतज़ार में खड़ी होती थी, लेकिन वह कोई अहंकार नहीं दिखाते थे, बस साधारण कुर्ता या कोट , साधारण चेहरा, और साधारण आवाज़, लेकिन जब वह मंच पर खड़े होकर पहला शेर पढ़ते थे, तो वह साधारणता एक अलौकिक रोशनी में बदल जाती थी, और भीड़ ख़ामोश हो जाती थी, क्योंकि वह जानते थे कि बशीर बद्र सिर्फ़ शेर नहीं पढ़ रहे होते, बल्कि वह अपनी ज़िंदगी के हर दर्द, हर खुशी, हर उम्मीद को शब्दों में ढाल रहे होते थे, और उसी वक़्त लोग समझ जाते थे कि यह वह शायर है जो आम आदमी के दुखों को समझता है, जो गरीबों की आवाज़ बुलंद करता है, जो मजदूरों के पसीने को शेर में बदल देता है।

बशीर बद्र की शायरी में जो एक अद्भुत बात है वह यह है कि वे किसी भी मुश्किल शब्द का सहारा नहीं लेते थे, वे उर्दू के भंगिमाओं और हिंदी की सरलता को इतने खूबसूरती से मिलाते थे कि उनका शेर उर्दू पढ़ने वाले और हिंदी बोलने वाले दोनों के दिलों में उतर जाता था, और यही वजह है कि उनके शेर दुनिया के दो दर्जन से ज्यादा मुल्कों में पुकारे गए, मुशायरों में गूंजे, और आज भी लाखों लोगों के होंठों पर हैं, क्योंकि बशीर बद्र ने शायरी को किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि आम इंसान के लिए लिखा, और यही उनकी असली ताकत थी, यही उनकी असली खूबसूरती थी, यही उनकी असली विरासत है।

एक किस्सा और है जो उनके चरित्र को दर्शाता है, जब एक बार एक युवक उनके पास आया और बोला कि साहब, मैं भी शायर बनना चाहता हूँ, लेकिन मुझे शब्द नहीं आते, तब बशीर बद्र ने मुस्कुराते हुए कहा कि बेटा, शब्द नहीं आते, ज़िंदगी से ले, ज़िंदगी को देख, ज़िंदगी को महसूस कर, ज़िंदगी को अपना, और वही शब्द बन जाएंगे, क्योंकि बशीर बद्र को पता था कि असली शायरी किताबों में नहीं होती, असली शायरी ज़िंदगी के हर पल में होती है, असली शायरी उस पसीने में होती है जो माथे से टपकता है, असली शायरी उस आंसू में होती है जो आँखों से गिरता है, असली शायरी उस मुस्कान में होती है जो होंठों पर आती है जब किसी की मदद होती है।

उनकी शायरी में एक और खासियत थी, वह यह कि वे प्रेम को भी ऐसे लिखते थे जैसे कोई प्रेम का गीत नहीं गा रहा हो, बल्कि कोई प्रेम के दर्द को शब्द दे रहा हो, और यही वजह है कि उनके प्रेम के शेर सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई अपने ही दिल की बात कह रहा हो, जैसे कोई अपने ही टूटे हुए दिल को जोड़ रहा हो, जैसे कोई अपने ही अधूरे सपनों को पूरा कर रहा हो, और यही वजह है कि उनके शेर आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसते हैं, और आज भी लाखों लोग उनके शेरों को पढ़कर अपने दिल की बात कहते हैं, अपने दिल का दर्द सुनाते हैं, अपने दिल की उम्मीदें जताते हैं।

जब बशीर बद्र के शेर पढ़े जाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई ज़िंदगी के हर पल को समझ रहा हो, जैसे कोई ज़िंदगी के हर दर्द को समझ रहा हो, जैसे कोई ज़िंदगी के हर खुशी को समझ रहा हो, और यही वजह है कि उनके शेर आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसते हैं, और आज भी लाखों लोग उनके शेरों को पढ़कर अपने दिल की बात कहते हैं, अपने दिल का दर्द सुनाते हैं, अपने दिल की उम्मीदें जताते हैं, और यही वजह है कि बशीर बद्र आज भी आम आदमी के शायर कहलाते हैं, और यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसती है।

बशीर बद्र की विरासत सिर्फ़ उनके शेरों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी विरासत उनकी विनम्रता है, उनकी सरलता है, उनकी आम आदमी के प्रति समर्पण है, और यही वजह है कि उन्हें याद रखना सिर्फ़ उनके शेरों को याद रखना नहीं है, बल्कि उनके चरित्र को याद रखना है, उनके विचारों को याद रखना है, उनकी विनम्रता को याद रखना है, और यही वजह है कि बशीर बद्र आज भी आम आदमी के शायर कहलाते हैं, और यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसती है।

बशीर बद्र का देहांत हुआ, लेकिन उनके शेर नहीं मरे, उनके शेर आज भी ज़िंदा हैं, आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसते हैं, आज भी लाखों लोग उनके शेरों को पढ़कर अपने दिल की बात कहते हैं, अपने दिल का दर्द सुनाते हैं, अपने दिल की उम्मीदें जताते हैं, और यही वजह है कि बशीर बद्र आज भी आम आदमी के शायर कहलाते हैं, और यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी लाखों लोगों के दिलों में बसती है, और यही वजह है कि बशीर बद्र हमेशा याद रखे जाएंगे, क्योंकि उनकी शायरी सिर्फ़ शब्द नहीं हैं, बल्कि उनकी शायरी ज़िंदगी है, उनकी शायरी छूट है, उनकी शायरी उम्मीद है, और यही वजह है कि बशीर बद्र हमेशा याद रखे जाएंगे।

बशीर बद्र साहब  , आपकी शायरी ने हमें सिखाया कि ज़िंदगी के हर पल को शब्दों में ढाला जा सकता है, ज़िंदगी के हर दर्द को शेर में बदला जा सकता है, ज़िंदगी के हर खुशी को गीत में बदला जा सकता है, और यही वजह है कि आप हमेशा याद रखे जाएंगे, क्योंकि आप सिर्फ़ एक शायर नहीं थे, बल्कि आप आम आदमी की आवाज़ थे, आप आम आदमी के दिल थे, आप आम आदमी की उम्मीद थे, और यही वजह है कि आप हमेशा याद रखे जाएंगे।

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