नेहा लिम्बोदिया की कविताएँ….

मध्य प्रदेश के इंदौर की निवासी युवा कवियत्री नेहा लिम्बोदिया की कविताएँ युवा मन को प्रतिबिंबित करती हैं, समाजकर्मी होने के कारण उनका मन संवेदनशील है और वह उनकी कविताओं में भी उतरता है. प्रतिष्ठित मंचों पर कविता पाठ करने के साथ ही उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं . प्रतुत है उनकी दो कविताएँ    

1

मैं नदिया  हूँ

चुलबुली ,आजाद निराली हूँ  

जमीन पर रहकर आसमा को समाती हूं

किसी को कम न किसी को ज्यादा

दिखाती हूं

मन आए तो सबको सताती हूँ  

मुझसे खुशियां मुझसे ही दुःख

लहराती हूँ फिर भी उड़ नहीं पाती हूँ  

मन आए तो राह बदलती हूँ

सागर की तरह नहीं

जो राह न बदल सकें

2

ये क्या टूटा?

यह क्या टूटा ?

जिसके टूटने की आवाज नहीं आई

जिसके टुकड़े फैले हैं कहां-कहां?

क्या किसी के दिल के टुकड़े हैं

क्यों फिर किसी के दिल को टूटना पड़ा है?

शीशे की तरह

वो तो मासूम है बच्चे की तरह ।

क्या इसे तोड़ना नहीं है भगवान को तोड़ना

वो तो बस मासूम था

बस प्यार कर बैठा

क्या प्यार करना गुनाह  था उसके लिए?

यह क्या टूटा……..

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