Heart Attack से पहले शरीर देता है ये 5 बड़े संकेत,भूलकर भी न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक या अन्य गंभीर हृदय समस्याएं अचानक नहीं होतीं, बल्कि शरीर पहले से कई चेतावनी संकेत देने लगता है। यदि इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर खतरे से बचा जा सकता है।

विश्व स्तर पर हृदय रोग मौतों की सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई लोग शुरुआती लक्षणों को गैस, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बाद में स्थिति गंभीर हो जाती है।

हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, सीने में भारीपन, दबाव, जकड़न या जलन महसूस होना दिल की बीमारी का सबसे सामान्य संकेत है। यदि यह परेशानी कुछ मिनटों तक बनी रहे या बार-बार महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर रोजमर्रा के सामान्य काम करने पर भी अत्यधिक थकान महसूस हो रही है या पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर में ऊर्जा नहीं रहती, तो यह संकेत हो सकता है कि दिल शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पा रहा है।

सीढ़ियां चढ़ते समय, तेज चलने पर या सामान्य गतिविधियों के दौरान सांस फूलना दिल की कमजोरी का संकेत हो सकता है। कई बार मरीजों को लेटने पर भी सांस लेने में परेशानी महसूस होती है।

जब हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसका असर पैरों, टखनों और पंजों में सूजन के रूप में दिखाई देता है।

बिना किसी मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आना, चक्कर महसूस होना या बेहोशी जैसी स्थिति बनना हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय से पहले होने वाले अधिकांश हार्ट अटैक को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रोका जा सकता है।

  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या व्यायाम करें।
  • धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
  • तनाव को नियंत्रित रखें।
  • नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
  • हर 6 महीने में हेल्थ चेकअप करवाएं।

यदि सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या अन्य लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो इन्हें सामान्य समस्या समझकर टालें नहीं। समय पर जांच और उपचार कई बार जान बचा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल की बीमारी के मामले में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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