UAPA के तहत 23 पाकिस्तानी आतंकी घोषित, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

आतंकवाद के खिलाफ अभियान को और तेज करते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय 23 आतंकियों को आधिकारिक रूप से ‘आतंकवादी’ घोषित कर दिया है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन आतंकियों पर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती, सीमा पार घुसपैठ, प्रशिक्षण, ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद की सप्लाई, फंडिंग और आतंकी हमलों की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं।
UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किए गए नाम
सरकार ने इन सभी 23 आतंकियों के नाम UAPA की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) में शामिल किए हैं। सूची में शामिल अधिकांश आतंकी प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े बताए गए हैं और पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय हैं।
इस कदम का उद्देश्य आतंकियों के नेटवर्क को कमजोर करना, उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई करना और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और मजबूत बनाना है।
हाफिज सईद के करीबी सहयोगी भी सूची में
गृह मंत्रालय के मुताबिक सूची में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद के तीन करीबी सहयोगियों को भी शामिल किया गया है।
इनमें राणा इफ्तिखार पर विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने का आरोप है।
अब्दुल रऊफ पर लश्कर और जमात-उद-दावा के लिए फंडिंग जुटाने तथा आतंकी योजनाओं में शामिल रहने का आरोप लगाया गया है। वहीं हाफिज खालिद वलीद को कई आतंकी घटनाओं का मास्टरमाइंड बताया गया है।
नागरोटा और सुंजवां हमलों से जुड़े आरोपी
सरकार द्वारा घोषित सूची में ऐसे कई आतंकी भी शामिल हैं, जिनका संबंध जम्मू-कश्मीर में हुए बड़े आतंकी हमलों से बताया गया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शाकूर और अब्दुल्ला जेहादी का नाम वर्ष 2016 में नागरोटा स्थित सेना कैंप पर हुए आतंकी हमले की साजिश से जुड़ा है।
वहीं मसूद इलियास कश्मीरी और मोहम्मद मुसद्दीक उर्फ हमजा पर सुंजवां सैन्य स्टेशन पर हुए आतंकी हमले से जुड़े होने के आरोप हैं। इन पर आतंकियों की भर्ती, घुसपैठ कराने और सीमा पार से हथियार भेजने में भूमिका निभाने का भी आरोप लगाया गया है।
ड्रोन, सोशल मीडिया और साइबर नेटवर्क पर भी कार्रवाई
सरकार ने ऐसे आतंकियों को भी सूची में शामिल किया है जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे।
मोहम्मद शाहिद फैसल पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती, आतंकी प्रशिक्षण, फंडिंग और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का उपयोग कर सुरक्षा एजेंसियों से बचने की तकनीक सिखाने के आरोप हैं।
इसके अलावा नजीर अहमद गुज्जर और वसीम नूर जाट पर ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद भारत भेजने का आरोप है। वहीं फिरदौस अहमद भट, गुलाम फरीद, हारून रशीद गनी, आबिद कयूम लोन और अन्य पर आतंकियों की घुसपैठ, लॉजिस्टिक्स और फंडिंग नेटवर्क संचालित करने के आरोप लगाए गए हैं।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
गृह मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सीमा पार संचालित उन आतंकी नेटवर्क पर नजर रख रही हैं जो ड्रोन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और सोशल मीडिया के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं।
इन 23 लोगों को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने से उनके खिलाफ संपत्ति जब्ती, यात्रा प्रतिबंध और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई जैसी कानूनी प्रक्रिया को और मजबूत आधार मिलेगा। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को इनके सहयोगियों और आतंकी मॉड्यूल पर कार्रवाई में भी मदद मिलेगी।
UAPA के तहत आतंकवादी घोषित होने का क्या मतलब?
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ जाता है। सरकार उसकी संपत्तियां जब्त कर सकती है, वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए सहयोग मांग सकती है।
इसके अलावा ऐसे व्यक्तियों के आतंकी नेटवर्क, फंडिंग चैनल और सहयोगियों के खिलाफ जांच एजेंसियों को कार्रवाई करने का मजबूत कानूनी आधार मिलता है।



