डा. उत्कर्ष सिन्हा नेपाल में 5 मार्च 2026 को होने वाले प्रतिनिधि सभा के आम चुनाव देश की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहे हैं। ये चुनाव सितंबर 2025 में जेनरेशन Z के नेतृत्व वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों का परिणाम हैं, जिन्होंने पुरानी सरकार को उखाड़ फेंका …
Read More »जुबिली डिबेट
बांग्लादेश चुनाव 2026: कट्टरपंथ का अस्वीकार और लोकतंत्र की नई दिशा
डा. उत्कर्ष सिन्हा बांग्लादेश की राजनीति में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुए हैं। यह चुनाव न केवल 2024 के छात्र आंदोलन के बाद की राजनीतिक अस्थिरता का परीक्षण था, बल्कि देश की जनता की आकांक्षाओं का आईना भी। चुनाव परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट …
Read More »समय से आगे बढ़ता महात्मा गांधी : एक वैश्विक संत की निरंतर उभरती महानता
प्रो.(डॉ.) सुमन कुमार शर्मा 30 जनवरी का दिन भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए आत्ममंथन का अवसर है। यह दिन महात्मा गांधी की शहादत की स्मृति से जुड़ा है—एक ऐसे व्यक्तित्व की, जिनका जीवन और विचार समय के साथ और अधिक प्रासंगिक, प्रभावशाली और प्रेरणादायी होते जा रहे …
Read More »सोशल मीडिया और गम्भीर लेखन – एक कड़वा सच
प्रो. अशोक कुमार जब मैंने”शिक्षा प्रदूषण” (Education Pollution) जैसे गंभीर विषयों पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की तो उम्मीद थी कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग और हितधारक (stakeholders) उस पर सार्थक चर्चा करेंगे। लेकिन सोशल मीडिया का वर्तमान ढांचा और मनोविज्ञान कुछ ऐसा हो गया है कि गंभीर लेखन अक्सर “मौन” …
Read More »आतंकवाद और भ्रष्टाचार दोनों ही सत्ता पोषित विकृतियां
स्मिता जैन “रेवा’ आतंकवाद और भ्रष्टाचार दोनों ही सत्ता पोषित सामाजिक विकृतियां है जो सत्ता के भूखे लोगों के द्वारा पूंजीपतियों के साथ मिलकर मासूम और बेगुनाह आम जनता को लूटने और भ्रमित करने के लिए किया जाता है और करवाया जाता है। जिसमें वर्तमान में और युगों से धर्म …
Read More »बीच चुनाव में बिखर गई नेपाली कांग्रेस,गगन थापा का दावा अब और मजबूत होगी पार्टी
यशोदा श्रीवास्तव :नेपाल की सबसे पुरानी और सबसे लंबे समय तक सरकार में रही नेपाली कांग्रेस अंततः दो फांक हो गई। पार्टी में व्याप्त असंतोष और अंतर्विरोध का यह परिणाम है। पार्टी के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा पर कमजोर नेतृत्व का आरोप लग रहा था। युवाओं की उपेक्षा और दिशा …
Read More »“जब भारत ने स्वयं को पहचाना: विवेकानंद से विकसित युवा तक”
प्रो. (डॉ.) सुमन कुमार शर्मा 12 जनवरी केवल एक तिथि नहीं है, यह उस चेतना का प्रतीक है जिसने भारत को आत्मविश्वास दिया, उसे अपनी जड़ों पर गर्व करना सिखाया और युवा शक्ति को राष्ट्रनिर्माण का केंद्र बनाया। इसी दिन स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ और इसी कारण इसे राष्ट्रीय …
Read More »शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्ते बनाम आवारा मानव तंत्र
प्रोफेसर अशोक कुमार (पूर्व कुलपति, कानपुर , गोरखपुर विश्वविद्यालय एंव विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय) किसी भी शैक्षणिक संस्थान की आत्मा उसका शांत और अनुशासित वातावरण होता है। हाल के वर्षों में विश्वविद्यालयों के भीतर दो प्रकार की चुनौतियाँ उभर कर सामने आई हैं: पहली, भौतिक सुरक्षा का खतरा (जैसे आवारा कुत्तों …
Read More »140 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला देश आखिर किसके भरोसे ?
स्मिता जैन”रेवा “ 140 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला देश आखिर किसके भरोसे है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 70 बार करीब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कह चुके हैं कि भारत पाकिस्तान का युद्ध मैंने रुकवाया । उसके बाद अब तो चीन ने भी कहना चालू कर दिया है कि …
Read More »बांग्लादेश : जमात का पुनरुत्थान, हिंदू उत्पीड़न और भारतीय मीडिया का खतरनाक खेल
डा. उत्कर्ष सिन्हा बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की बढ़ती ताकत और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के सिलसिले ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को नाजुक मोड़ दिया है। भारतीय टीवी मीडिया का सांप्रदायिक रंग वाली कवरेज इस तनाव को और गहरा रहा है, जो कूटनीति के मोर्चे पर नुकसानदेह साबित हो रहा है। इस …
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