Video: सीरिया में बाल-बाल बचे राष्ट्रपति मैक्रों! होटल के बाहर कार बम धमाका, 6 की मौत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सीरिया दौरे के दौरान राजधानी दमिश्क में हुए धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था और देश की स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह धमाके उस समय हुए जब मैक्रों सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। धमाकों में कम से कम 18 लोग घायल हुए हैं, जबकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाके ‘फोर सीजन्स होटल’ के पास हुए, जहां मैक्रों ठहरे हुए थे। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीरिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है, खासकर ऐसे समय में जब देश खुद को पुनर्निर्माण और वैश्विक सहयोग के लिए तैयार दिखाने की कोशिश कर रहा है।

मैक्रों का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। 2024 में अहमद अल-शरा के सत्ता में आने के बाद यह किसी बड़े पश्चिमी नेता की पहली यात्रा है। इस दौरे का मकसद सीरिया को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोबारा स्थापित करना और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। मैक्रों ने यूरोप और अमेरिका को सीरिया पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने के लिए पहले भी अहम भूमिका निभाई है।

बताया जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर होने हैं, जिससे युद्धग्रस्त सीरिया में निवेश को बढ़ावा मिल सके।

हालांकि, धमाकों की यह घटना राष्ट्रपति अल-शरा के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। वे 2024 में बशर अल-असद को सत्ता से हटाने वाले विद्रोह का नेतृत्व कर सत्ता में आए थे और तब से देश में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन देश के भीतर विभिन्न गुटों की हिंसा अब भी चुनौती बनी हुई है।

अल-शरा की सरकार अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाने और देश के पुनर्निर्माण के लिए प्रयासरत है, लेकिन उनका अतीत और आतंकी संगठनों से जुड़े आरोप अब भी उनके लिए एक बड़ी बाधा हैं।

14 साल के लंबे युद्ध ने सीरिया को बुरी तरह तबाह कर दिया है। लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और बुनियादी ढांचा लगभग नष्ट हो चुका है। ऐसे में मैक्रों का दौरा एक नई शुरुआत का संकेत माना जा रहा था, लेकिन धमाकों ने यह साफ कर दिया है कि सीरिया में स्थिरता की राह अभी भी आसान नहीं है।

यह घटना न सिर्फ सीरिया की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीनी हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

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