बच्चों में मोटापे का नया कारण आया सामने! रिसर्च में जंक फूड नहीं, ये वजह

बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर आमतौर पर जंक फूड और खराब खान-पान को सबसे बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि, एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि वायु प्रदूषण, खासकर PM2.5 के संपर्क में आने से भी बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रदूषित हवा बच्चों के मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो इच्छाओं और आवेग (इम्पल्स) को नियंत्रित करता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अध्ययन वायु प्रदूषण और मोटापे के बीच संबंध (association) दिखाता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि प्रदूषण ही मोटापे का एकमात्र या प्रत्यक्ष कारण है। बच्चों में मोटापा कई कारकों जैसे खान-पान, शारीरिक गतिविधि, आनुवंशिकता और पर्यावरण के संयुक्त प्रभाव से विकसित हो सकता है।

रिसर्च के मुताबिक, जन्म के समय या जीवन के पहले वर्ष में अधिक PM2.5 के संपर्क में आने वाले बच्चों को आगे चलकर अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करने में अधिक कठिनाई हो सकती है। इससे वे भूख या खाने की इच्छा पर कम नियंत्रण रख पाते हैं, जो आगे चलकर वजन बढ़ने और मोटापे के जोखिम से जुड़ सकता है।

शोधकर्ताओं ने इम्पल्स कंट्रोल (आवेग नियंत्रण) को बच्चों में मोटापे से जुड़े संभावित जैविक तंत्र के रूप में चिन्हित किया है।

अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों ने जीवन के शुरुआती चरण में अधिक प्रदूषित हवा में समय बिताया, उनमें 4 से 8 वर्ष की आयु के दौरान शरीर में अधिक चर्बी जमा होने और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) बढ़ने की संभावना अधिक देखी गई।

शोध के सह-लेखक जमील लेन का कहना है कि मोटापे पर अधिकांश शोध केवल खान-पान और व्यायाम पर केंद्रित रहे हैं, जबकि वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारकों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है।

PM2.5 हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे बेहद सूक्ष्म कण होते हैं। ये मुख्य रूप से वाहनों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और ईंधन जलने से उत्पन्न होते हैं।

ये कण फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। वैज्ञानिक पहले से ही इन्हें श्वसन रोगों, हृदय संबंधी समस्याओं और कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ते रहे हैं। नई रिसर्च में इनके बच्चों के मस्तिष्क और व्यवहार पर संभावित प्रभाव की भी जांच की गई है।

यह अध्ययन माउंट सिनाई के इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने किया। इसमें मेक्सिको सिटी में वर्ष 2007-08 के दौरान जन्मे 434 बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था और जन्म के बाद पहले वर्ष के दौरान अधिक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले बच्चों में बाद के वर्षों में इम्पल्स कंट्रोल कमजोर होने और मोटापे के बढ़े हुए जोखिम के संकेत मिले।

शोधकर्ताओं ने स्वयं स्वीकार किया है कि इस अध्ययन की कुछ सीमाएं भी हैं। इसमें प्रतिभागियों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी और अध्ययन एक सीमित आबादी पर आधारित था। इसलिए इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए बड़े और विभिन्न देशों में किए जाने वाले अध्ययनों की आवश्यकता होगी।

  • AQI अधिक होने पर बच्चों की बाहरी गतिविधियां सीमित करें।
  • घर के आसपास धुआं और धूल कम रखने का प्रयास करें।
  • संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दें।
  • यदि संभव हो तो स्वच्छ हवा वाले वातावरण में बच्चों को अधिक समय बिताने दें।
  • बच्चे में लगातार वजन बढ़ने की स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

यह अध्ययन इस ओर संकेत करता है कि बच्चों के स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का प्रभाव केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि यह उनके मस्तिष्क और व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, मोटापे की समस्या बहु-कारक (multifactorial) है और इसके लिए केवल किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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