US-Iran War: अमेरिका के हमलों पर भड़का ईरान, UN चार्टर का उल्लंघन बताकर दी खुली चेतावनी- ‘US का साथ देने वाले देश भुगतेंगे अंजाम’

Highlights
- ईरान के 5 राज्यों पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद तेहरान ने दी बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया।
- ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को बताया संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर का खुला उल्लंघन।
- खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी- ‘अगर अमेरिका को जमीन दी, तो सीधे हमारे निशाने पर होगे’।
- ईरान ने ओमान वार्ता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को ‘पूरी तरह झूठ’ बताया।
जुबिली स्पेशल डेस्क
तेहरान/वाशिंगटन। होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका द्वारा ईरान के 5 राज्यों पर किए गए मेगा-अटैक से मिडिल ईस्ट में कोहराम मचा हुआ है। अमेरिकी सेना के इस भीषण हमले पर अब ईरान की ओर से पहली आधिकारिक और बेहद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर का सीधा उल्लंघन करार दिया है। इसके साथ ही तेहरान ने अमेरिका का साथ देने वाले देशों को भी गंभीर अंजाम भुगतने की खुली चेतावनी दे डाली है।
खाड़ी देशों को ईरान की दोटूक चेतावनी: ‘वैध लक्ष्य’ माने जाएंगे सहयोगी देश
ईरानी विदेश मंत्रालय ने खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के पड़ोसी देशों को आगाह करते हुए एक बड़ा बयान जारी किया है।
ईरान की चेतावनी: तेहरान ने साफ कहा है कि कोई भी देश जो अपने सैन्य क्षेत्र, एयरस्पेस या अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों के लिए करने देगा, उसे ईरान अपनी रक्षात्मक जवाबी कार्रवाई में एक ‘वैध सैन्य लक्ष्य’ (Valid Target) मानेगा और उस पर भी मिसाइलें दागी जाएंगी।
इसके साथ ही, ईरान ने वाशिंगटन पर क्षेत्रीय स्थिरता को पूरी तरह से कमजोर करने और पूर्व के युद्धविराम समझौतों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वह अमेरिका की इस तानाशाही के खिलाफ उसे जवाबदेह ठहराए।
डोनाल्ड ट्रंप के दावों को बताया ‘सफेद झूठ’
ईरानी विदेश मंत्रालय ने ओमान के मस्कट में हुई हालिया गोपनीय चर्चाओं को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने ट्रंप के दावों को ‘पूरी तरह झूठ’ बताते हुए कहा कि इस वार्ता में केवल होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी व्यवस्थाओं पर ही ध्यान केंद्रित किया गया था, न कि ईरान के पीछे हटने पर।
UN महासचिव के बयान पर भी जताई कड़ी आपत्ति
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव के उस बयान पर भी गहरा ऐतराज जताया है, जिसमें उन्होंने ईरान के पलटवार को ‘सैन्य टकराव’ का नाम दिया था। बकाई ने तर्क दिया:
- आत्मरक्षा का अधिकार: अमेरिका और इजरायल के लगातार उकसावे और हमलों के बाद ईरान ने केवल अपने आत्मरक्षा के वैध अधिकार (Right to Self-Defense) का इस्तेमाल किया है।
- नामकरण पर विवाद: उन्होंने वैश्विक मंचों से यह भी मांग की कि संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार इस समुद्री क्षेत्र के लिए केवल ‘पर्शियन गल्फ’ (Persian Gulf) नाम का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
अमेरिका ने ईरान के इन 5 प्रांतों को बनाया निशाना
गौरतलब है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निर्देश पर यूएस आर्मी ने रविवार को ईरान के पांच रणनीतिक प्रांतों—होर्मुजगन, मरकाजी (अहवाज), बुशहर, खुजेस्तान और सिस्तान-बलूचिस्तान पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। इन हमलों में खुजेस्तान में एक नागरिक की मौत और पांच के घायल होने की खबर है। अमेरिका का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।


