तुर्की की इसराइल को खुली चेतावनी, हकान फ़िदान बोले- टकराव से नहीं डरते

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच तुर्की और इसराइल के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने इसराइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह इस समय “एक नए दुश्मन की तलाश में है”। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसराइल तुर्की के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों के खिलाफ कोई कदम उठाता है, तो तुर्की पीछे हटने वाला नहीं है।

गुरुवार को CNN Türk को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में फ़िदान ने कहा कि तुर्की किसी भी संभावित टकराव से डरता नहीं है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। वहीं, इस बयान पर इसराइल की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इसराइली नेताओं और विश्लेषकों ने फ़िदान के बयान को उकसाऊ बताते हुए इसकी निंदा की है।

हकान फ़िदान ने कहा कि जब तक इसराइल या कोई अन्य देश तुर्की के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों के खिलाफ काम करेगा, तब तक अंकारा को न तो डरने की जरूरत है और न ही पीछे हटने की।

उन्होंने कहा,

“अगर मामला टकराव तक पहुंचता है तो यह हमारे लिए कोई समस्या नहीं है। हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम हैं।”

फ़िदान ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान केवल किसी सैन्य संघर्ष की चेतावनी नहीं है, बल्कि तुर्की की विदेश नीति का स्पष्ट संदेश है कि वह क्षेत्रीय मामलों में अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।

तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि इसराइल को केवल तुर्की या राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का मुद्दा मानना गलत होगा।

उन्होंने कहा,

“इसराइल सिर्फ मेरी समस्या नहीं है। यह पूरी दुनिया की समस्या है। यह केवल तुर्की की समस्या नहीं है और न ही सिर्फ राष्ट्रपति अर्दोआन का मुद्दा है।”

फ़िदान ने कहा कि राष्ट्रपति अर्दोआन केवल वही बात खुलकर कह रहे हैं, जिसे दुनिया के कई देश निजी बातचीत में स्वीकार करते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से बोलने से बचते हैं।

उनके अनुसार,

“फर्क सिर्फ इतना है कि राष्ट्रपति अर्दोआन खुलकर गलत को गलत कह रहे हैं।”

हकान फ़िदान ने कहा कि दुनिया के कई देशों को इसराइल की नीतियों पर आपत्ति है, लेकिन अधिकांश सरकारें खुलकर अपनी बात रखने से बचती हैं।

उन्होंने कहा कि लोग बंद कमरों में इस मुद्दे पर चर्चा करते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर बोलने से हिचकिचाते हैं। उनके मुताबिक, यह केवल तुर्की की जिम्मेदारी नहीं है कि वह इस मुद्दे को उठाए, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

तुर्की के विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसराइल के खिलाफ कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इसराइल की नीतियां मानवता पर बोझ बन चुकी हैं।

फ़िदान ने कहा,

“मानवीय अंतरात्मा इसे स्वीकार नहीं कर सकती। राजनीतिक व्यवस्था इसे संभाल नहीं सकती और आर्थिक व्यवस्था भी इसे सहन नहीं कर सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि दुनिया वास्तव में इस संकट का समाधान चाहती है तो केवल बयान देना पर्याप्त नहीं होगा। सभी देशों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।

फ़िदान के बयान के तुरंत बाद इसराइल की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

इसराइल के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी गिडियोन सार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि तुर्की के विदेश मंत्री ने बेहद उकसाऊ भाषा का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहूदियों के खिलाफ इस प्रकार की भाषा इतिहास के सबसे खतरनाक दौर की याद दिलाती है।

सार ने कहा कि तुर्की के नाटो सहयोगियों को इस बयान की स्पष्ट और कड़ी निंदा करनी चाहिए।

इसराइली पत्रकार मारियो नावफल ने दावा किया कि तुर्की अब खुद को क्षेत्र में इसराइल विरोधी ताकत के रूप में स्थापित करना चाहता है।

उन्होंने लिखा कि हमास और हिज़्बुल्लाह के कमजोर होने के बाद तुर्की इस क्षेत्र में नई राजनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

वहीं, इसराइल के चैनल 14 के कूटनीतिक संवाददाता तमिर मोराग ने कहा कि इसराइल लंबे समय से तुर्की को भविष्य के सबसे बड़े रणनीतिक खतरों में से एक मानता रहा है।

तमिर मोराग के अनुसार, तुर्की से बढ़ते तनाव को देखते हुए इसराइल अपनी नौसैनिक और वायु सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार—

  • पूर्वी भूमध्यसागर में नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाई जा रही है।
  • नौसेना के आधुनिकीकरण की योजना पर तेजी से काम हो रहा है।
  • तुर्की को F-35 लड़ाकू विमान मिलने से रोकने के लिए भी कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

इसराइल का मानना है कि यदि तुर्की को अत्याधुनिक F-35 विमान मिलते हैं तो क्षेत्र में उसकी सैन्य बढ़त प्रभावित हो सकती है।

जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय और तेल अवीव विश्वविद्यालय से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ योसी शाइन का कहना है कि तुर्की लगातार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस समय इसराइल और तुर्की के बीच केवल राजनीतिक मतभेद नहीं हैं, बल्कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी लगातार बढ़ रही है।

उनके अनुसार गज़ा युद्ध और ईरान के साथ तनाव के बाद मध्य पूर्व की शक्ति-संतुलन की राजनीति तेजी से बदल रही है और तुर्की इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

इस वर्ष फरवरी में इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट ने भी चेतावनी दी थी कि तुर्की, क़तर और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे तत्वों के बीच बढ़ता सहयोग इसराइल के लिए भविष्य में चुनौती बन सकता है।

उन्होंने कहा था कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन इसराइल को क्षेत्रीय स्तर पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं और इस खतरे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की और इसराइल के बीच बयानबाजी भले ही लगातार तीखी होती जा रही हो, लेकिन दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष की संभावना फिलहाल सीमित है।

इसके पीछे कई कारण हैं—

  • तुर्की नाटो का सदस्य है।
  • अमेरिका दोनों देशों का अहम सहयोगी है।
  • दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हित प्रत्यक्ष युद्ध से बचने के पक्ष में हैं।

हालांकि गज़ा युद्ध, सीरिया, पूर्वी भूमध्यसागर और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, जिससे भविष्य में कूटनीतिक संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।

निष्कर्ष

हकान फ़िदान के ताजा बयान ने तुर्की और इसराइल के बीच जारी कूटनीतिक टकराव को एक नया आयाम दे दिया है। तुर्की जहां इसराइल की नीतियों की खुलकर आलोचना करते हुए प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा है, वहीं इसराइल इन बयानों को उकसाऊ और अस्वीकार्य बता रहा है। आने वाले समय में मध्य पूर्व की बदलती राजनीतिक परिस्थितियां, गज़ा संकट और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेंगे।

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