स्कूल की किताबों में भारी गड़बड़ी! हम्पी को कोणार्क, बॉलीवुड गाने और 1600 गलतियां बनीं विवाद

ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को स्कूल की नई पाठ्यपुस्तकों में सामने आईं भारी-भरकम गलतियों को लेकर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए तैयार और वितरित की गई नई किताबों में 1,600 से अधिक गलतियां मिलने के बाद राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

मामले ने तब तूल पकड़ा जब गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर शिक्षकों ने नई किताबों की जांच की। इसमें वर्तनी, अनुवाद, तथ्य, नक्शे और विषय-वस्तु से जुड़ी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आईं। इन गलतियों के कारण अभिभावकों, शिक्षकों और विपक्ष ने सरकार को घेर लिया।

सरकार ने लापरवाही के आरोप में स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी, प्रलिप्ता मिश्रा, दिलीप कुमार साहू और भारती टुडू को निलंबित कर दिया है।

इसके अलावा शिक्षा विभाग के विभिन्न प्रकोष्ठों में कार्यरत छह सहायक निदेशकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इन पुस्तकों को टीचर एजुकेशन डायरेक्टरेट और SCERT ने एनईपी-2020 के तहत नए पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया था।

नई किताबों में कई ऐसी गलतियां मिली हैं, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य गलतियां इस प्रकार हैं—

  • विश्व धरोहर हम्पी को कोणार्क सूर्य मंदिर के रूप में दिखा दिया गया।
  • कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को ओडिशा विधानसभा बताकर प्रकाशित किया गया।
  • नियमगिरि पहाड़ियों को ओडिशा की बजाय झारखंड में दिखाया गया।
  • कक्षा आठ की ओड़िया पुस्तक में बॉलीवुड के लोकप्रिय गीत ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ और ‘बुमरो-बुमरो’ शामिल कर दिए गए।
  • चौथी कक्षा की अंग्रेजी पुस्तक में पेपर बोट पर ओड़िया कविता और पांचवीं की अंग्रेजी पुस्तक में राजा पर्व का गीत प्रकाशित कर दिया गया।
  • कई अध्यायों में वर्तनी, व्याकरण और तथ्यों से जुड़ी गंभीर त्रुटियां भी मिलीं।

इन गलतियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और छात्र भी इन्हीं पन्नों पर रील बनाकर शेयर कर रहे हैं।

मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

बीजेडी ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।

पार्टी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने आरोप लगाया कि नई पाठ्यपुस्तकों की छपाई में करीब 380 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और गलत किताबें छापने में खर्च हुए सरकारी धन की जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली करने की मांग की।

विवाद बढ़ने के बाद स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग के सचिव एन. तिरुमाला नाइक ने कहा कि सरकार सभी त्रुटिपूर्ण संस्करण वापस लेगी और संशोधित किताबें दोबारा छापकर छात्रों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई किताबें कब तक छात्रों तक पहुंचेंगी। फिलहाल शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे कक्षा में पढ़ाते समय इन गलतियों को मौखिक रूप से सुधारें और छात्रों को सही जानकारी दें।

शिक्षाविदों का कहना है कि नई शिक्षा नीति लागू करने की जल्दबाजी में किताबों की गुणवत्ता से समझौता किया गया।

एक शिक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक की 55 नई ओड़िया माध्यम की पाठ्यपुस्तकें महज छह महीने के भीतर तैयार कर प्रकाशित कर दी गईं, जबकि सामान्य तौर पर किसी भी पाठ्यपुस्तक को तैयार करने में कई दौर की समीक्षा, विशेषज्ञों की राय, संपादन और प्रूफरीडिंग की जरूरत होती है।

उनका कहना है कि यदि पर्याप्त समय दिया जाता तो इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने नहीं आतीं।

‘राइट टू एजुकेशन फोरम’ (ओडिशा चैप्टर) के संयोजक अनिल प्रधान ने आरोप लगाया कि कई किताबों का अनुवाद बिना पर्याप्त विशेषज्ञ समीक्षा के सीधे अंग्रेजी से ओड़िया में किया गया।

कुछ शिक्षाविदों का दावा है कि सामग्री तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी उपयोग किया गया, जिससे कई संदर्भ और तथ्य गलत हो गए। हालांकि सरकार ने इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पहले से ही चुनावी ड्यूटी, बीएलओ कार्य और जनगणना जैसे अतिरिक्त काम करने पड़ते हैं। अब गलत किताबों को कक्षा में सुधारकर पढ़ाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर डाल दी गई है।

शिक्षकों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण भी नहीं मिला है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

राज्य सरकार ने इस वर्ष करीब 40 लाख छात्रों को नई पाठ्यपुस्तकें वितरित की हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आने से लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूर-दराज और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा, क्योंकि वहां पहले से ही शिक्षकों की कमी है और छात्रों को गलतियों को स्वयं सुधारने का अवसर भी कम मिलता है।

सरकार ने हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सुधार प्रक्रिया शुरू कर दी है। संशोधित किताबें छापने की तैयारी चल रही है, जबकि विभागीय जांच भी जारी है। इस बीच विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से लगातार उठा रहा है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।

ओडिशा में नई शिक्षा नीति के तहत शुरू हुआ यह शैक्षणिक सुधार अब पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।

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