मिडिल ईस्ट संकट: ईरान ने USA से तोड़ा ‘गुप्त संवाद’, क्या अब दुनिया झेलेगी आर्थिक महासंकट?

तेहरान/वाशिंगटन।मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। लेबनान और गाजा में इजराइली हमलों से नाराज ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही बैक-चैनल (अप्रत्यक्ष) बातचीत को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है।

ईरानी न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक इजराइल लेबनान में संघर्ष-विराम का उल्लंघन बंद नहीं करता और गाजा-लेबनान से अपने सैनिक पीछे नहीं हटाता, तब तक ओमान या अन्य मध्यस्थों के जरिए अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी।लेकिन इस राजनीतिक गतिरोध के पीछे एक और बड़ी चेतावनी छिपी है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकती है।

ईरान ने केवल बातचीत ही नहीं रोकी है, बल्कि उसने अपने ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ (जिसमें हिजबुल्लाह, हूती और अन्य सहयोगी शामिल हैं) के साथ मिलकर इजराइल और उसके पश्चिमी समर्थकों की घेराबंदी का नया प्लान तैयार किया है।

ईरान अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान इसे पूरी तरह बंद करने पर विचार कर रहा है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह बंद हुआ, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
  • बाब अल-मन्देब (Bab al-Mandeb): लाल सागर के इस मुहाने को सक्रिय कर ईरान और हूती विद्रोही स्वेज नहर की तरफ जाने वाले मालवाहक जहाजों का रास्ता पूरी तरह ठप कर सकते हैं।

“एक मोर्चे पर उल्लंघन, यानी सब पर उल्लंघन” ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सख्त लहजे में अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा, “लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई सभी मोर्चों पर संघर्ष-विराम का उल्लंघन है। इसके जो भी गंभीर परिणाम होंगे, उसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इजराइल की होगी।”

  • कूटनीति का अंत, सीधे टकराव की आशंका: अब तक अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए एक ‘सेफ्टी वाल्व’ खुला हुआ था, जो युद्ध को सीधे टकराने से रोकता था। बातचीत बंद होने से गलतफहमी या सीधे युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
  • सप्लाई चेन पर पर सीधा असर: यदि ईरान अपने इरादों पर आगे बढ़ता है, तो एशिया से यूरोप और अमेरिका जाने वाले सामानों की डिलीवरी हफ्तों लेट हो जाएगी, जिससे दुनिया भर में महंगाई की नई लहर आ सकती है।

ईरान के इस कड़े रुख ने अब गेंद अमेरिका और इजराइल के पाले में डाल दी है। देखना होगा कि वाशिंगटन इस आर्थिक और रणनीतिक दबाव का क्या जवाब देता है।

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