Ram Mandir Row: ‘राम मंदिर में हजारों करोड़ की चोरी पर चुप क्यों हैं PM?’ राहुल गांधी और खरगे ने खोला मोर्चा, चिट्ठी लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग!

अयोध्या के राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे में चोरी का मुद्दा अब एक बड़े सियासी चक्रवात में बदल चुका है। 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद तल्ख साझा पत्र लिखा है। कांग्रेस के दोनों दिग्गज नेताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की तत्काल स्वतंत्र जांच कराने और करोड़ों श्रद्धालुओं के दान का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
राम मंदिर विवाद की 5 सबसे बड़ी बातें
- चोरी के आरोपों पर पत्र: राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ‘हजारों करोड़ रुपये की चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया है।
- चंदे का हिसाब हो पब्लिक: कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि ट्रस्ट को मिले कैश (नकद), सोने और चांदी सहित सभी तरह के चढ़ावे के रिकॉर्ड को जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए।
- पीएम की चुप्पी पर सवाल: पत्र में कहा गया है कि इतने बड़े अपराध और वित्तीय हेरफेर के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ है।
- ट्रस्ट के गठन पर घेरा: विपक्ष ने याद दिलाया कि भले ही ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बना हो, लेकिन इसके सदस्यों की नियुक्ति पूरी तरह सरकार ने की है, जो RSS और वीएचपी (VHP) से जुड़े हैं।
- SIT कर रही है जांच: फिलहाल इस पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है, जो अपनी रिपोर्ट सीधे देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के सामने पेश करेगी।
“श्रद्धालु खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं”-पत्र में तीखे आरोप
प्रधानमंत्री मोदी को लिखे इस संयुक्त पत्र में कांग्रेस नेतृत्व ने देश के करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं का हवाला दिया है। राहुल और खरगे ने लिखा:
विपक्ष का बड़ा बयान: “लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी अटूट आस्था, भक्ति और खून-पसीने की कमाई को मंदिर के लिए दान किया था। लेकिन ट्रस्ट में हुई इस भारी चोरी के बाद देश का आम श्रद्धालु खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता अब इसी बात पर टिकी है कि इस मामले में कितनी पारदर्शिता दिखाई जाती है।”
‘पद या प्रभाव’ की परवाह किए बिना हो सख्त कार्रवाई
कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाए ताकि हर एक देशवासी को पता चल सके कि उनके चढ़ावे का उपयोग कहां और कैसे हुआ है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि इस घोटाले में जो भी लोग शामिल पाए जाएं, चाहे उनका पद कितना भी बड़ा हो या उनका राजनीतिक प्रभाव कितना भी मजबूत हो, उन्हें बिना किसी ढिलाई के जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
SIT की जांच और सुप्रीम कोर्ट पर टिकी निगाहें
यह पूरा विवाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्राप्त दान और जमीनों के सौदों में कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा हुआ है। फिलहाल इस मामले की गहराई से जांच करने के लिए SIT (Epitome of Investigation) का गठन किया गया है। अदालती निर्देशों के मुताबिक, SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
आगे क्या होगा? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राहुल गांधी और खरगे के इस साझा पत्र ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष इस बार संसद में राम मंदिर के मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह घेरने जा रहा है, जिससे सदन में भारी हंगामे के आसार बन गए हैं।
