चंदन की छाया में महकेंगे गजल के सुर

जुबिली न्यूज डेस्क

लखनऊ का इतिहास अपनी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों एवं उपलब्धियो के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है।  लखनऊ सिर्फ तबले और कथक का घराना ही नहीं रहा बल्कि उर्दू शायरी का भी कामयाब घराना माना जाता है। लखनऊ की खास देन है बेहतरीन गजलें ।

उर्दू काव्य की एक धारा गजल बनकर मोहब्बत करने वालों के दिल में बहने लगी । लखनऊ के  अनेक ऐसे कलाकार हैं जो बेहतरीन गजल गायक हैं,उन्ही में एक हैं  मिथिलेश लखनवी , जिनकी गजल यात्रा का सफर लगभग 40 वर्षों का है । जिन्होंने न सिर्फ लखनऊ में बल्कि देश और विदेश में भी अपनी ग़ज़ल गायकी का जलवा बिखेरा ।

शांति सांस्कृतिक कला केंद्र लखनऊ में कला  और कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में पिछले ढाई माह से गजल की एक कार्यशाला श्री मिथिलेश लखनवी जी द्वारा आयोजित की जा रही है जिसमें  आपको लखनऊ के कई नए चेहरे ग़ज़ल गाते हुए दिखेंगे। यह सब कोई प्रोफेशनल ग़ज़ल गायक नहीं है बल्कि उन्हें गायकी का सलीका पिछले ढाई माह से मिथिलेश सिखा रहे हैं और उनके हुनर को तराश  रहे हैं । जिसमें देश के बहुत प्रसिद्ध शायरों की गजलें हैं जिसमे अहमद फ़राज़ ,निदा फ़ाज़ली ,शमीम जयपुरी, कैफ़ी आज़मी और लखनऊ के भी बहुत प्रसिद्ध शायर मीर तक़ी मीर और कृष्ण बिहारी नूर जैसे प्रसिद्ध शायर हैं ।

उनकी गायकी को सुनने  और निखारने के लिए मुंबई से सुप्रसिद्ध गज़ल गायक चंदन दास  लखनऊ आयेंगे, मिथिलेश ने बताया कि चन्दन दास इस बात से बहुत खुश हैं कि कम से कम लखनऊ में ग़ज़ल की एक ऐसी कार्यशाला हो रही है। चंदन दास जी न केवल नए ग़ज़ल गायकों को सुनेंगे बल्कि अपनी बेहतरीन गजलें भी वह लखनऊ वासियों को सुनाएंगे।

गजल का शौक रखने वाले और चंदन दास जी को सुनने वाले सभी श्रोतागण 25 जुलाई की शाम कला मंडपम प्रेक्षागृह ,भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के सामने,कैसरबाग में यह कार्यक्रम देख सकते हैं ।

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