बिना नाम पट्टी वाले सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पर सवाल, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली में युवाओं और छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, बिना नामपट्टी वाले सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और कथित रूप से सामान्य वस्त्रधारी व्यक्तियों की भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने इस पूरे प्रकरण पर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर तत्काल संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की है।

अजय राय ने अपने पत्र में कहा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे युवाओं, छात्रों और छात्राओं के साथ संवाद के बजाय दमनात्मक रवैया अपनाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर से संसद तक हुए शांतिपूर्ण मार्च के दौरान पानी की बौछार, लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रसारित वीडियो-चित्रों में कई सुरक्षाकर्मियों के नाम-पट्ट न होने तथा कुछ सामान्य वेशभूषा वाले लोगों के लाठी लेकर कार्रवाई में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं, जो पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

उन्होंने पत्र में नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली पर लगातार उठते सवाल और रि-नीट से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के लाखों युवा पहले से ही गहरे अविश्वास और निराशा से गुजर रहे हैं। ऐसी स्थिति में संवाद के स्थान पर बल प्रयोग करना संविधान की भावना के विपरीत है।

अजय राय ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत केंद्र सरकार से छात्र मार्च पर बल प्रयोग की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, बिना नामपट्टी वाले सुरक्षाकर्मियों अथवा कथित अनधिकृत व्यक्तियों की भूमिका की जांच, तथा परीक्षा संबंधी शिकायतों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक निर्देश दें।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और शांतिपूर्ण विरोध को दमन से नहीं, संवाद से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे महात्मा गांधी और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की लोकतांत्रिक विरासत से जुड़ा प्रश्न बताया।

नई दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस व्यवस्था को लेकर पहले भी मीडिया रिपोर्टों में बिना पहचान वाले कर्मियों तथा विशेष तैनाती जैसे पहलुओं पर चर्चा सामने आ चुकी है, जबकि अजय राय के राष्ट्रपति को पत्र लिखने की प्रवृत्ति उनके हालिया सार्वजनिक बयानों और हस्तक्षेप मांगों से भी मेल खाती है

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