मोदी सरकार की नजर 5 बड़े संवैधानिक संशोधनों पर, पास हुए तो टूट सकता है ये रिकॉर्ड

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आने वाले समय में संविधान में पांच बड़े संशोधन करने की तैयारी में है। यदि सरकार इन संशोधनों को संसद से पारित कराने में सफल रहती है, तो संवैधानिक संशोधनों के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल का रिकॉर्ड पीछे छूट सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकार को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की चुनौती का सामना करना होगा।

पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार संविधान में आठ संशोधन कर चुकी है। इसी साल अप्रैल में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन संसद में लाने की कोशिश की थी, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण वे पारित नहीं हो सके। अब सरकार एक बार फिर बड़े संवैधानिक बदलावों की तैयारी में जुटी है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार दिया गया है। बदलती राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार संविधान में संशोधन किए जा सकते हैं। हालांकि, ऐसे संशोधनों के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष यानी दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। संविधान के मूल ढांचे और मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित सीमाओं का भी पालन करना पड़ता है।

1. परिसीमन (Delimitation)
सरकार लोकसभा सीटों के नए परिसीमन के लिए संविधान में संशोधन करना चाहती है। जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों का पुनर्निर्धारण लंबे समय से लंबित है। अप्रैल में इसे आगे बढ़ाने की कोशिश हुई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली।

2. महिला आरक्षण लागू करना
महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसके बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी।

3. ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’
मोदी सरकार लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की योजना पर आगे बढ़ना चाहती है। इसके लिए संविधान के कई प्रावधानों में संशोधन आवश्यक होगा।

4. न्यायिक और संवैधानिक सुधार
सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे सुधारों को व्यापक संवैधानिक ढांचे के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी में है। उत्तराखंड जैसे कुछ राज्यों में यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं।

5. जेल जाने पर इस्तीफे का प्रावधान
सरकार ऐसा संवैधानिक प्रावधान लाने पर भी विचार कर रही है, जिसके तहत यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल जाता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर पद छोड़ना होगा।

किस सरकार ने किए सबसे ज्यादा संविधान संशोधन?

संविधान में सबसे अधिक संशोधन करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम है। उनके कार्यकाल में 30 बार संविधान में बदलाव किए गए। इनमें कई संशोधन मौलिक अधिकारों और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े थे।

अब तक विभिन्न प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में हुए प्रमुख संशोधन इस प्रकार हैं—

  • जवाहरलाल नेहरू: 16 संशोधन
  • लाल बहादुर शास्त्री: 1 संशोधन
  • इंदिरा गांधी: 30 संशोधन
  • मोरारजी देसाई: 2 संशोधन
  • राजीव गांधी: 12 संशोधन
  • वी.पी. सिंह: 5 संशोधन
  • पी.वी. नरसिम्हा राव: 11 संशोधन
  • चंद्रशेखर: 1 संशोधन
  • अटल बिहारी वाजपेयी: 14 संशोधन
  • मनमोहन सिंह: 6 संशोधन
  • नरेंद्र मोदी: अब तक 8 संशोधन

संविधान संशोधन सामान्य विधेयकों की तुलना में अधिक जटिल प्रक्रिया है। सरकार को न केवल लोकसभा बल्कि राज्यसभा में भी विशेष बहुमत जुटाना होगा। कुछ संशोधनों के लिए आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी भी जरूरी होती है। ऐसे में विपक्ष का सहयोग या पर्याप्त संख्या का समर्थन सरकार के लिए अहम होगा।

यदि प्रस्तावित पांचों संशोधन संसद से पारित हो जाते हैं, तो मोदी सरकार संवैधानिक बदलावों के लिहाज से अपने कार्यकाल का सबसे बड़ा अध्याय लिख सकती है। साथ ही, राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के कार्यकाल में हुए संशोधनों का रिकॉर्ड भी पीछे छूट सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह संसद के संख्याबल और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा।

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