UP By-Election 2026: 7 महीने से खाली हैं 3 विधानसभा सीटें, फिर भी उपचुनाव का ऐलान क्यों नहीं?

उत्तर प्रदेश में तीन विधानसभा सीटें पिछले कई महीनों से खाली हैं, लेकिन अब तक इन पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। देश के अन्य राज्यों में उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन उत्तर प्रदेश को लेकर चुनाव आयोग की चुप्पी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीटों पर मतदाता लंबे समय से अपने नए जनप्रतिनिधि का इंतजार कर रहे हैं।

सबसे पहले घोसी विधानसभा सीट 20 नवंबर 2025 को खाली हुई थी। इसके बाद जनवरी 2026 में बरेली की फरीदपुर सीट से भाजपा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का निधन हो गया। वहीं, सोनभद्र की दुद्धी सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह का भी जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में निधन हो गया।

दोनों विधायकों के निधन के बाद विधानसभा सचिवालय ने जनवरी में ही सीटें रिक्त होने की सूचना चुनाव आयोग को भेज दी थी। इसके बावजूद अब तक उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार किसी विधानसभा सीट के रिक्त होने पर सामान्य परिस्थितियों में छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना चाहिए। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में चुनाव आयोग इस अवधि से आगे भी चुनाव करा सकता है।

घोसी सीट को खाली हुए करीब सात महीने से अधिक समय हो चुका है, जबकि फरीदपुर और दुद्धी सीटों पर भी छह महीने पूरे होने के करीब हैं। ऐसे में उपचुनाव में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया के कारण उपचुनाव टाल दिए गए। यह प्रक्रिया अक्टूबर 2025 के अंत में शुरू हुई थी और इसे दो बार बढ़ाया गया। चुनाव आयोग ने 10 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची भी जारी कर दी।

हालांकि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उपचुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इससे राजनीतिक दलों और मतदाताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश समेत पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों और आगामी जनगणना कार्यक्रम का भी चुनावी कैलेंडर पर असर पड़ सकता है।

भारत की जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होना प्रस्तावित है। यदि विधानसभा चुनाव भी पहले की तरह फरवरी-मार्च में होते हैं, तो दोनों कार्यक्रमों के बीच टकराव की संभावना बन सकती है। इसी वजह से यह चर्चा भी तेज है कि कुछ राज्यों के चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।

तीनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन चुनाव आयोग की घोषणा नहीं होने से उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं में असमंजस बना हुआ है। स्थानीय मतदाता भी अपने क्षेत्र में विकास कार्यों और जनप्रतिनिधित्व के अभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि उत्तर प्रदेश की इन तीन रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कब किया जाता है।

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