टूटते पुल,ढहती सड़कें ..जिम्मेदार  कौन?

आजकल शहरों के सौंदर्यीकरण और सड़कों के चौड़ीकरण के लिए हजारों लाखों मकानों ,दुकानों, मंदिरों , जंगलों , गांवों, कालोनियों और सालों से बसे हुए शहरों इत्यादि को बुलडोजर से नष्ट किया जाता है लेकिन इसके बाद जो सड़क और मेगा निर्माण  होता है वह पहली ,दूसरी बारिश से ही नष्ट हो जाता है ,टूट जाता है आखिर यह है कैसा निर्माण हो रहा है।

निर्माण का लगभग एक चौथाई रुपया तो सिर्फ शानदार उद्घाटन में खर्च किया जाता है ,प्रचार और मीडिया पर खर्च किया जाता है लेकिन सड़के,पुल आदि उद्घाटन के दो-चार दिन या 1 महीने 2 महीने में है टूट रही हैं और पुल भर भरा कर गिर रहे हैं।

रेलवे स्टेशन पर बारिश से बचने के लिए लोग शेड के नीचे आते हैं लेकिन वहीं पर बारिश हो रही है ।स्कूल, कॉलेज, इमारतें, सरकारी भवन कुछ भी तो सुरक्षित नहीं है। सभी के सभी अपनी दुर्दशा पर रो रहे हैं।

इतिहास में सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मौर्य साम्राज्य द्वारा निर्मित न जाने कितने मेगा स्ट्रक्चर आज भी सही सलामत है और मुगलों और अंग्रेजों के द्वारा बनाई गई कई इमारतें ,पुल आदि आज भी सुरक्षित है ,संरक्षित है ।

लेकिन 2014 के बाद से हुए निर्माण क्यों टूट टूट कर चिल्ला रहे हैं कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है और हमें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है।

क्या यह सारे निर्माण मुफ्त में होते हैं या भारत के पास इतना पैसा है कि वह यह सब बनाकर और नेताओं, कर्मचारियों ,गोदी मीडिया और छुटभैआ लोगों का पेट भर सकता है।

अब तो हद होने लगी जब रोज खबरें आती हैं कि कभी महाराष्ट्र ,कभी बिहार, कभी पुणे ,कभी उत्तराखंड ,कभी दिल्ली कभी मध्य प्रदेश आदि आदि के नवनिर्मित प्रधानमंत्री जी के द्वारा उद्घाटन किए गए पूल, राष्ट्रीय राजमार्ग टूट टूट कर गिर रहे हैं।

क्या भारत के सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री और माननीय प्रधानमंत्री जी को यह सब नहीं दिखता? या फिर अनदेखी कर किसी बड़े भयंकर  हादसे का इंतजार कर रहे हैं ताकि आपदा में अवसर निकाला जा सकें।

केमरामैन और गोदी मीडिया की गिद्ध फौज को ले जाकर अपने अपने फायदे उठाये जा सकें और फ़ोटो सेशन किया जा सकें।

आम जनता बुलडोजर से टूटे हुए घरों के कारण सड़क पर या बेघर होकर अपना जीवन भीषण बारिश,ठंडी और गर्मी के दिनों में जानवरों की तरह है अपना जीवन गुजार रही है लेकिन मजाल है कि किसी के कानों पर  भी जूं रेंग रही हो और अच्छे मजबूत निर्माण कार्यों बिना भ्रष्टाचार के करने की कोशिश की जा रही हो।

क्या उनकी कोई जवाबदारी नहीं है। क्या सिर्फ कमीशन खाना और विदेश यात्रा करना ही उनका राजनीतिक उद्देश्य है ?

यह कैसा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाया जा रहा है। क्या हिंदुओं का सिर्फ शोषण किया जा रहा है हिंदू राष्ट्र के नाम पर जैसे की जो भी कार्य किए जाते हैं उनका उल्टा ही उद्देश्य होता है।आम जनता को कुछ कहा जाता है और वास्तविकता उसके उलट ही होती है।

क्या अब बहुसंख्यक हिंदू राष्ट्र को चोट नहीं पहुंचती जब उसके प्राकृतिक संसाधनों का और घरों का चीरहरण और शोषण नहीं हो रहा है। रक्षक ही भक्षक  बनकर कार्य कर रहे हैं।

(लेखिका स्वतंत्र लेखन करती हैं और छतरपुर की निवासी हैं)

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