संभल जाइए! फिर बिगड़ने वाला है घर का बजट, जून में महंगाई ने तोड़े सारे रिकॉर्ड; RBI भी हैरान!

नई दिल्ली। देश में पिछले काफी समय से काबू में दिख रही खुदरा महंगाई ने एक बार फिर करवट ले ली है। जून महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है। यह पिछले 17 महीनों में पहली बार है जब महंगाई का आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य (Medium-term Target) को पार कर गया है। इसके साथ ही देश में अपेक्षाकृत नियंत्रित महंगाई का एक लंबा दौर फिलहाल समाप्त होता दिख रहा है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई में यह दर 3.93% थी। हालांकि, जून का यह आंकड़ा बाजार (रायटर्स सर्वे) के 4.3% के अनुमान के बेहद करीब है, लेकिन नई बेस ईयर और संशोधित कंजप्शन बास्केट लागू होने के बाद का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
महंगाई बढ़ने के 3 मुख्य विलेन
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस अचानक आए उछाल के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
- खाद्य और ईंधन की ऊंची कीमतें: रोजमर्रा की जरूरी चीजों की लागत लगातार बढ़ रही है।
- भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension): वेस्ट एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संकट के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन और क्रूड ऑयल पर दबाव है।
- असमान मानसून: देश के कई हिस्सों में मानसून की अनिश्चितता ने कृषि उत्पादन और फसलों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
थाली पर बढ़ा दबाव: आलू-टमाटर में राहत, फिर भी खाद्य महंगाई 5.32% पार
राहत की बात यह रही कि जून में आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 20.34% और टमाटर के दामों में 31.92% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद, ओवरऑल फूड बास्केट पर दबाव कम नहीं हुआ है।
- खाद्य महंगाई (Food Inflation): मई के 4.78% से उछलकर जून में यह 5.32% पर पहुंच गई है।
- शहरी बनाम ग्रामीण: महंगाई की मार शहरों से ज्यादा गांवों पर पड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.45% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.09% दर्ज की गई।
- ट्रांसपोर्टेशन का तड़का: परिवहन क्षेत्र में महंगाई 4.31% रही, जबकि माल ढुलाई (Freight) से जुड़ी महंगाई 7.70% के ऊंचे स्तर पर है, जो सीधे तौर पर हर सामान की लागत को बढ़ा रही है।
RBI के सामने अब क्या है चुनौती?
महंगाई के इस यू-टर्न ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। जून की बैठक में RBI ने ब्याज दरों (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखते हुए अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखा था। लेकिन अब 4% के टारगेट से ऊपर निकलते ही केंद्रीय बैंक के लिए आने वाले दिनों में ब्याज दरों में कटौती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
आम जनता और आपकी जेब पर क्या होगा असर?
घरेलू बजट बिगड़ेगा: अगर महंगाई इसी तरह 4% के ऊपर टिकी रहती है, तो दूध, अनाज, फल और पेट्रोल-डीजल जैसी बुनियादी चीजों के दाम ऊंचे बने रहेंगे, जिससे मिडिल क्लास का मासिक बजट प्रभावित होगा।
कच्चे तेल का डबल अटैक: यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल और महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ (आयातित महंगाई) का खतरा बढ़ जाएगा।
मानसून पर टिकी नजरें: यदि आने वाले हफ्तों में मानसून ने रफ्तार नहीं पकड़ी या इसका वितरण असमान रहा, तो कृषि पैदावार घटने से त्योहारों के सीजन से पहले खाने-पीने की चीजें और ज्यादा महंगी हो सकती हैं।

