US-Iran War Latest: दहला मिडिल ईस्ट! बहरीन-कुवैत में गूंजे हवाई हमले के सायरन, अमेरिकी नौसेना के 5th फ्लीट मुख्यालय पर हमले का दावा

जुबिली स्पेशल डेस्क
तेहरान/मनामा। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। बुधवार और गुरुवार की पूरी रात अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर की गई चौतरफा बमबारी के बाद खाड़ी देशों (Gulf Region) में युद्ध की भीषण आग भड़क उठी है। ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के बाद पूरे गल्फ क्षेत्र में ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया गया है।
गुरुवार को बहरीन और कुवैत में आसमान से बरसती मिसाइलों और ड्रोनों के कारण भारी धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनात सैनिकों के लिए स्थिति किसी बुरे सपने जैसी बन गई है।
1. बहरीन में गूंजे सायरन, अमेरिकी नौसेना के ‘फिफ्थ फ्लीट’ पर हमले का दावा
समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, गुरुवार को बहरीन की राजधानी मनामा में अचानक हवाई हमले के सायरन बज उठे, जिससे नागरिकों में दहशत फैल गई।
- सुरक्षित स्थानों पर भागने की अपील: बहरीन के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर नागरिकों और विदेशी निवासियों से तुरंत नजदीकी सुरक्षित स्थानों या बंकरों में जाने की अपील की है।
- 5th फ्लीट बना निशाना: इसी बीच, ईरानी सरकारी मीडिया ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण फिफ्थ फ्लीट (Fifth Fleet) मुख्यालय को ईरान ने सीधे निशाने पर लिया है। हालांकि, अमेरिकी या बहरीन के अधिकारियों ने अभी तक इस मुख्यालय को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
2. कुवैत में एयर डिफेंस एक्टिव, आसमान में ही मार गिराए गए ड्रोन
उधर, कुवैत की धरती भी धमाकों की गूंज से कांप उठी। कुवैती सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव है और वे लगातार “दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों” को इंटरसेप्ट (हवा में ही नष्ट) कर रहे हैं।
सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, जनता को सुनाई दे रहे धमाके दरअसल एयर डिफेंस मिसाइलों द्वारा दुश्मन के हथियारों को नष्ट किए जाने के कारण हो रहे हैं। कुवैत ने सुरक्षा कारणों से यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये मिसाइलें किस दिशा से दागी गई थीं।
3. CENTCOM का रुख: ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को सुरक्षित रखना मकसद
इस भीषण टकराव के बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर किए गए हमलों का बचाव किया है। CENTCOM का आरोप है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में कमर्शियल जहाजों के खिलाफ लगातार आक्रामक कार्रवाइयां कर रहा था। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद जहाजों की आजादी को खतरा पहुंचाने की ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह पस्त करना है।
4. ईरान के रडार पर खाड़ी देशों में मौजूद ये 6 बड़े अमेरिकी ठिकाने
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता पर हुए हमले के बदले खाड़ी क्षेत्र में मौजूद किसी भी अमेरिकी बेस को नहीं छोड़ेगा। वर्तमान में अमेरिका के सबसे अहम ठिकाने इन्हीं देशों में हैं जो अब सीधे युद्ध की जद में आ चुके हैं:
- बहरीन: यहाँ अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट का सबसे बड़ा मुख्यालय है।
- कुवैत: यहाँ ‘अली अल सलेम एयर बेस’ सहित कई बड़े ठिकाने हैं, जहाँ लगभग 13,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
- कतर: यहाँ ‘अल उदीद एयर बेस’ स्थित है, जिसे पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे बड़ा एयर बेस और कमांड सेंटर माना जाता है।
- यूएई (UAE): ‘अल धफरा एयर बेस’ जहाँ से अमेरिका अपने टोही, खुफिया और हवाई ऑपरेशन्स चलाता है।
- सऊदी अरब: रक्षा सहयोग और तेल सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका का रणनीतिक गढ़।
- जॉर्डन: यहाँ अमेरिका के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अहम सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
वैश्विक संकट: खाड़ी के देशों में फैले इस डर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार और कूटनीतिज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अगर यह टकराव आज रात भी जारी रहता है, तो पूरा मिडिल ईस्ट एक ऐसे विनाशकारी संकट में फंस जाएगा जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।



