उद्धव ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ीं, शिवसेना के सामने एक और संकट

नई दिल्ली। लोकसभा सांसदों की बगावत से जूझ रही Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों के Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद अब संसद भवन परिसर में मिले पार्टी ऑफिस पर भी संकट मंडराने लगा है।
यदि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस घटनाक्रम को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है तो शिवसेना UBT के संसदीय दल में केवल 4 सांसद बचेंगे। ऐसे में संसद में पार्टी को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।
संसद ऑफिस जाने की संभावना
नियमों के अनुसार आमतौर पर जिन दलों के लोकसभा में 5 या उससे अधिक सांसद होते हैं, उन्हें संसद परिसर में कार्यालय उपलब्ध कराया जाता है। सांसदों की संख्या घटने के बाद शिवसेना UBT इस मानक से नीचे आ जाएगी।
फिलहाल उद्धव ठाकरे गुट का संसदीय दल कार्यालय संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के रूम नंबर 128-A में है। यह कार्यालय अविभाजित शिवसेना के पुराने कार्यालय के पास स्थित है।
सर्वदलीय बैठकों में भागीदारी पर भी सवाल
सांसदों की संख्या कम होने का असर महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाली सर्वदलीय बैठकों में पार्टी की भागीदारी पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर कम सांसद संख्या वाले दलों को ऐसी बैठकों में शामिल किए जाने की संभावना कम रहती है।
लोकसभा स्पीकर से मिलेंगे ठाकरे गुट के नेता
इस बीच लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने ठाकरे गुट के लोकसभा नेता Arvind Sawant और Anil Desai को बैठक के लिए बुलाया है।
ठाकरे गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर मांग की थी कि दल बदलने वाले सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता न दी जाए। अब इस बैठक के नतीजे पर सभी की नजरें टिकी हैं।
शिंदे गुट में शामिल सांसद बोले- विकास के लिए लिया फैसला
वहीं ठाकरे गुट छोड़कर शिंदे सेना में शामिल हुए शिरडी सांसद Bhausaheb Wakchaure ने अपने फैसले का बचाव किया है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। उन्होंने दावा किया कि उनके समर्थकों में इस फैसले को लेकर उत्साह है और वह अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा जारी रखेंगे।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
6 सांसदों के पाला बदलने के बाद महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ शिंदे गुट इसे समर्थन बढ़ने के रूप में देख रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे गुट इसे राजनीतिक दबाव और चुनौती के तौर पर देख रहा है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के फैसले से स्थिति और साफ होगी।



