नकली बीजों का जाल: महाराष्ट्र से यूपी तक हजारों किसान परेशान, ऐसे बचें इस धोखाधड़ी से

नई दिल्ली: इस साल अल नीनो के असर से देश में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में किसानों के सामने पहले से ही चुनौतीपूर्ण मौसम है। लेकिन कई राज्यों में किसानों के लिए इससे भी बड़ी परेशानी नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीज बनकर सामने आई है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के करीब 18 जिलों में हजारों किसानों की सोयाबीन की फसल बुवाई के 20–25 दिन बाद भी अंकुरित नहीं हुई। शुरुआती जांच में इसके पीछे नकली बीजों की आशंका जताई गई है।

अब तक 5,000 से अधिक किसानों ने पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन से शिकायत की है। सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और कई बीज कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र अकेला राज्य नहीं है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, गुजरात और तेलंगाना समेत कई राज्यों में नकली या गैर-मानक बीजों की बिक्री के मामले सामने आए हैं।

  • उत्तर प्रदेश: झांसी और इटावा में नकली मूंगफली बीज बेचने के मामलों में कार्रवाई हुई। राज्य सरकार ने बीजों की ट्रैकिंग के लिए ‘साथी’ पोर्टल शुरू किया है।
  • मध्य प्रदेश: सागर और जबलपुर में गैर-मानक बीजों की री-पैकिंग करने वाले गोदामों पर छापे पड़े।
  • राजस्थान: मूंगफली के करीब 15 करोड़ रुपये के घटिया बीज जब्त किए गए।
  • तेलंगाना: बड़ी मात्रा में नकली कपास के बीज पकड़े गए।

नकली बीज बेचने वाले कई तरीकों से किसानों को धोखा देते हैं—

  • नामी कंपनियों जैसी पैकिंग और लोगो की नकल।
  • बिना प्रमाणित बीजों को हाईब्रिड या अधिक उत्पादन वाला बताकर बेचना।
  • पुराने या एक्सपायर बीजों की नई पैकिंग।
  • असली बीज में घटिया बीज मिलाकर बेचना।
  • बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं के जरिए गांवों में बिक्री।

नकली बीजों का असर केवल एक फसल तक सीमित नहीं रहता।

  • बीज अंकुरित नहीं होते।
  • पौधे कमजोर निकलते हैं।
  • उत्पादन में भारी कमी आती है।
  • दोबारा बुवाई करनी पड़ती है।
  • खेती की लागत और कर्ज बढ़ जाता है।

सोयाबीन, धान, कपास, बाजरा, मूंगफली और हाइब्रिड सब्जियों के बीजों में नकली होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।

किसानों को बीज खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए—

  • केवल लाइसेंसधारी विक्रेता से बीज खरीदें।
  • खरीद का पक्का बिल जरूर लें।
  • पैकेट पर बैच नंबर और लॉट नंबर जांचें।
  • प्रमाणन (Certification) टैग देखें।
  • अंकुरण प्रतिशत और पैकिंग/एक्सपायरी की तारीख पढ़ें।
  • पैकेट खोलने से पहले उसकी फोटो लें।
  • पैकेट और बिल सुरक्षित रखें।

यदि किसान को बीज की गुणवत्ता पर संदेह हो तो—

  • तुरंत जिला कृषि अधिकारी को सूचना दें।
  • कृषि विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
  • खेत का निरीक्षण कराने का अनुरोध करें।
  • जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता आयोग या अदालत का रुख करें।

शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग—

  • बीज के नमूने जब्त करता है।
  • लैब में गुणवत्ता की जांच कराता है।
  • दोषी पाए जाने पर विक्रेता का लाइसेंस निलंबित या रद्द कर सकता है।
  • संबंधित कानूनों के तहत जुर्माना और जेल जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
  • कई राज्यों में प्रभावित किसानों को मुआवजा या वैकल्पिक बुवाई के लिए सहायता भी दी जाती है।

नकली बीजों की बिक्री पर कार्रवाई के लिए प्रमुख कानून हैं—

  • Seeds Act, 1966
  • Seeds Rules, 1968
  • Seeds (Control) Order, 1983
  • Essential Commodities Act

नकली बीज केवल एक किसान की फसल नहीं, बल्कि कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम बारिश और नकली बीजों की दोहरी मार किसानों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकती है। इसलिए जागरूकता, सख्त निगरानी और समय पर कार्रवाई इस समस्या से निपटने के लिए बेहद जरूरी है।

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