‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ या ‘स्ट्रेट ऑफ ईरान’? ट्रंप के एक शब्द ने दुनिया को उलझाया

दुनिया भर में गहराते तेल और गैस संकट के बीच शुक्रवार को एक बड़ी राहत भरी खबर आई। ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। लेकिन इस राहत के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

1. ईरान का बड़ा यू-टर्न: क्या हैं शर्तें?

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद से बंद पड़ा यह रास्ता अब जहाजों के लिए खुलेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार:

  • शर्त: यह जलमार्ग तब तक खुला रहेगा जब तक मिडिल ईस्ट में सीजफायर (युद्धविराम) लागू है।
  • सस्पेंस: अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अराघची का इशारा अमेरिका-ईरान के बीच 22 अप्रैल तक चलने वाले सीजफायर की ओर है या इजरायल-लेबनान के बीच जारी 10 दिनों के विराम की ओर।

2. ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ से ‘स्ट्रेट ऑफ ईरान’ तक का सफर

डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ‘होर्मुज’ के लिए नए नामों का इस्तेमाल किया, जिससे लोग हैरान हैं

  • तंज या कूटनीति?: ट्रंप ने इसे “STRAIT OF IRAN” कहकर संबोधित किया। विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है कि क्या अमेरिका ने इस रास्ते पर ईरान के पूर्ण अधिकार को स्वीकार कर लिया है?
  • मजाकिया अंदाज: इससे पहले उन्होंने चुटकी लेते हुए इसे “स्ट्रेट ऑफ ट्रंप” कह दिया था। बाद में अपनी गलती सुधारते हुए उन्होंने कहा, “फेक न्यूज़ वाले कहेंगे कि मैंने गलती से ऐसा कहा, लेकिन मेरे साथ एक्सीडेंट्स नहीं होते।”

3. ट्रंप का ‘शब्दकोश’: जब राष्ट्रपति ने गढ़े नए शब्द

ट्रंप का ‘स्ट्रेट ऑफ ईरान’ कहना उनकी पुरानी भाषाई गलतियों (या प्रयोगों) की याद दिलाता है। यहाँ उनके कुछ चर्चित शब्द दिए गए हैं:

वर्षशब्द/वाक्यांशअसल में क्या कहना चाहते थे
2017Covfefeकवरेज (Press Coverage) – इसका मतलब आज भी एक रहस्य है।
2019Hamberdersहैम्बर्गर्स (Hamburgers) – फुटबॉल टीम को दावत देते समय कहा।
2017Nambiaनामीबिया (Namibia) – अफ्रीकी नेताओं के सामने दो बार गलत उच्चारण।
2016Biglyबिग लीग (Big League) – चुनावी रैलियों में अक्सर इस्तेमाल किया।

राहत के पीछे छिपी अनिश्चितता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन जैसा है, क्योंकि दुनिया की 20% तेल-गैस सप्लाई यहीं से होती है। हालांकि, ट्रंप के शब्दों की बाजीगरी और ईरान की सीजफायर वाली शर्त ने इस राहत को फिलहाल ‘अस्थायी’ बना कर रखा है।

अमेरिका और ईरान के बीच घोषित वर्तमान सीजफायर की समयसीमा 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है, जो आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतों के लिए निर्णायक साबित होगी।

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