Cervical Cancer Screening: भारत में बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर का खतरा, अब ये टेस्ट बन सकते हैं गेम चेंजर

नई दिल्ली। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और बीमारी की पहचान न हो पाने के कारण हर साल हजारों महिलाओं की जान जा रही है। ऐसे में महंगे HPV टेस्ट के मुकाबले सस्ते और स्वदेशी टेस्ट देश में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का लगातार संक्रमण माना जाता है। खासतौर पर हाई-रिस्क HPV संक्रमण महिलाओं में कैंसर का खतरा बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर स्क्रीनिंग और जांच के जरिए इस बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है।

डॉ. नीरजा भाटला के अनुसार HPV टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की पहचान का सबसे सटीक तरीका है, लेकिन इसकी लागत अधिक होने के कारण बड़ी आबादी तक इसकी पहुंच नहीं बन पाती। वहीं VIA (Visual Inspection with Acetic Acid) टेस्ट सस्ता है, लेकिन इसका उपयोग अभी भी सीमित है।

उन्होंने कहा कि देश में कम लागत वाले Point-of-Care (PoC) HPV टेस्ट विकसित करने की जरूरत है, जिससे महिलाओं की जांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी संभव हो सके।

PoC टेस्टिंग ऐसी जांच प्रक्रिया है जिसमें सैंपल को किसी बड़ी लैब में भेजने की जरूरत नहीं होती। जांच स्थल पर ही टेस्ट किया जाता है और कम समय में परिणाम मिल जाते हैं। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग आसान हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सस्ता, भरोसेमंद और आसानी से उपलब्ध HPV टेस्ट विकसित हो जाता है, तो 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

डॉ. नीरजा भाटला ने बताया कि भारत में विकसित HPV टेस्ट का मूल्यांकन करने के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन चल रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे टेस्ट विकसित करना है जो सर्वाइकल कैंसर से जुड़े सबसे सामान्य HPV प्रकारों की पहचान कर सकें।

इन टेस्टों को जिला और उप-जिला स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही इन्हें संचालित करने के लिए अत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञता या जटिल मशीनों की आवश्यकता नहीं होगी।

भारत में सर्वाइकल कैंसर आज भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में हर साल लगभग 1.27 लाख नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 80 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर 3 से 5 साल में सर्वाइकल कैंसर की जांच करानी चाहिए। सरकार के राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम में स्तन, मुख और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शामिल है।

हालांकि जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच और जांच न करा पाने की वजह से स्क्रीनिंग का कवरेज अभी भी काफी कम है।

World Health Organization के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए HPV टेस्टिंग सबसे प्रभावी तरीका है। संगठन का मानना है कि यदि उच्च गुणवत्ता वाले HPV टेस्ट का इस्तेमाल किया जाए तो महिलाओं को केवल दो बार—35 और 45 वर्ष की आयु में—स्क्रीनिंग कराने की आवश्यकता होगी।

लेकिन चुनौती यह है कि अधिकांश HPV टेस्ट महंगे हैं और उनके लिए उन्नत लैब, मशीनें तथा प्रशिक्षित तकनीशियनों की जरूरत होती है। यही कारण है कि ग्रामीण और अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं में इनकी उपलब्धता सीमित है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत में कम लागत वाले स्वदेशी HPV टेस्ट बड़े स्तर पर उपलब्ध हो जाते हैं, तो सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान आसान होगी और हजारों महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। यह कदम देश में महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।

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