चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट में हलचल, क्या अब कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी छोड़ेंगे पद?

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में लगातार बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के पद छोड़ने के बाद अब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के इस्तीफे की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, ट्रस्ट या गोविंद देव गिरी की ओर से अभी तक इस्तीफे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। टीवी9 की ओर से संपर्क किए जाने पर भी उन्होंने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सूत्र: पद छोड़ने की इच्छा जताई
सूत्रों के अनुसार, गोविंद देव गिरी ने निजी कारणों और समय की कमी का हवाला देते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पद से हटने की इच्छा जताई है। बताया जा रहा है कि वे अन्य धार्मिक और सामाजिक दायित्वों में व्यस्त रहने के कारण अयोध्या में पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला 22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में लिया जा सकता है।
चढ़ावा मामले के बाद उठे सवाल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे। कोषाध्यक्ष होने के नाते गोविंद देव गिरी की भूमिका पर भी सवाल किए गए।
इससे पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें चढ़ावे की गणना में कथित गड़बड़ी की जानकारी नहीं थी। उनका कहना था कि वे मुंबई में रहते हैं और नियमित रूप से अयोध्या नहीं आ पाते। ट्रस्ट के कुछ सदस्य समय-समय पर वित्तीय जानकारी उन्हें उपलब्ध कराते थे।
ट्रस्ट सदस्य ने क्या कहा?
ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा कि केवल इस्तीफा देने की इच्छा जताने से इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता।
उन्होंने कहा कि यदि किसी सदस्य ने इस्तीफा दिया है तो ट्रस्ट की बैठक में उस पर विचार किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रकार की गलती सिद्ध नहीं होती है तो केवल इच्छा के आधार पर इस्तीफा स्वीकार करना जरूरी नहीं है।
क्यों अहम है कोषाध्यक्ष का पद?
राम मंदिर ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष का पद वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन में अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष की अहम भूमिका होती है।
हाल ही में ट्रस्ट ने वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैंक खातों के संचालन हेतु तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। इसके बावजूद कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
चढ़ावा विवाद के बाद लगातार हो रहे बदलाव
चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट में कई प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं। हाल के दिनों में:
- महासचिव चंपत राय ने पद छोड़ा।
- ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी जिम्मेदारी से हटने का निर्णय लिया।
- कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव बनाया गया।
- CEO की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई।
- वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तीन सदस्यीय बैंक संचालन समिति गठित की गई।
अब 22 जुलाई को होने वाली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां गोविंद देव गिरी के भविष्य और ट्रस्ट में संभावित प्रशासनिक बदलावों पर चर्चा हो सकती है।



