चौंकाने वाली रिपोर्ट! Instagram के जरिए कथित तौर पर हो रहा था अवैध कंटेंट का प्रचार

एक चौंकाने वाली पड़ताल में BBC वर्ल्ड सर्विस ने दावा किया है कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जिनके जरिए बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़ी अवैध सामग्री का प्रचार किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन विज्ञापनों में आपराधिक प्रकृति के शब्दों का इस्तेमाल किया गया और यूजर्स को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के उन चैनलों तक पहुंचाया गया, जहां कथित तौर पर यह सामग्री पैसे लेकर उपलब्ध कराई जा रही थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम का विज्ञापन सिस्टम इन विज्ञापनों को पहले मंजूरी देता था, जिसके बाद वे यूजर्स की फीड में दिखाई देते थे।इस माडिया संस्थान का कहना है कि उसने जब एक ऐसे विज्ञापन की शिकायत की, तो शुरुआती समीक्षा में उसे प्लेटफॉर्म की कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं माना गया।
पड़ताल?
बता दे कि जांच के लिए भारत में एक नया इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया। शुरुआत में इस अकाउंट ने केवल कुछ ऐसे प्रोफाइल फॉलो किए, जिनमें हल्के स्तर का यौन-संकेतक (sexually suggestive) कंटेंट मौजूद था।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ही दिनों में उस अकाउंट की फीड में पहले वयस्क अश्लील सामग्री से जुड़े विज्ञापन आने लगे। इसके बाद कथित तौर पर ऐसे विज्ञापन भी दिखाई देने लगे, जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बेचने का प्रचार किया जा रहा था और Telegram चैनलों के लिंक दिए गए थे।
जांच के दौरान उसे इस तरह के दर्जनों विज्ञापन दिखाई दिए, जिनमें कई विज्ञापन अलग-अलग अकाउंट से बार-बार साझा किए गए थे।
शिकायत के बाद भी नहीं हटाया गया एक विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, उसने एक ऐसे विज्ञापन की रिपोर्ट की, जिसमें एक बेहद कम उम्र की बच्ची की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था और उससे जुड़े टेक्स्ट में यौन हिंसा का संकेत दिया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 घंटे बाद इंस्टाग्राम की ओर से जवाब मिला कि समीक्षा टीम को विज्ञापन कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता हुआ नहीं मिला।
हालांकि बाद में सवालों के जवाब में Meta ने कहा कि उसने कई संबंधित विज्ञापन हटा दिए, संबंधित अकाउंट सस्पेंड किए और नीति का उल्लंघन करने वाले कई URL भी ब्लॉक कर दिए।
Meta ने क्या कहा?
Meta ने कहा कि बच्चों का यौन शोषण एक गंभीर अपराध है और कंपनी इससे निपटने के लिए लगातार काम कर रही है।
कंपनी के अनुसार:
- कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होता।
- विज्ञापनों की समीक्षा के बाद भी लगातार निगरानी की जाती है।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों और अकाउंट्स पर कार्रवाई की जाती है।
- बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी कानून के अनुरूप National Center for Missing & Exploited Children (NCMEC) को भेजी जाती है।
- वर्ष 2025 में संदिग्ध गतिविधियों वाले 40 लाख से अधिक अकाउंट हटाए गए।
Meta ने यह भी कहा कि यह आरोप गलत है कि कंपनी जानबूझकर ऐसे विज्ञापनों को बढ़ावा देती है या राजस्व के लिए सुरक्षा से समझौता करती है।
Telegram का जवाब
Telegram ने बताया कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री हटाने के लिए तकनीक और मानव मॉडरेटर दोनों का इस्तेमाल करता है।
कंपनी के अनुसार:
- वर्ष 2026 में ऐसे 2.74 लाख से अधिक ग्रुप और चैनल हटाए गए।
- CSAM (Child Sexual Abuse Material) के प्रसार को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि BBC की जांच में बताया गया कि उसके द्वारा रिपोर्ट किए गए दो चैनलों में से एक हटाया गया, जबकि दूसरे पर कथित तौर पर नई सामग्री पोस्ट होती रही।
पूर्व Meta अधिकारी ने एल्गोरिद्म पर उठाए सवाल
Facebook (अब Meta) के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रायन बोलैंड ने कहा कि इंस्टाग्राम का एल्गोरिद्म यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए धीरे-धीरे अधिक उत्तेजक कंटेंट दिखाने की दिशा में काम करता है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसे सिस्टम की पर्याप्त निगरानी न हो और प्राथमिकता केवल क्लिक व राजस्व बढ़ाने पर रहे, तो गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
रिटायर्ड जस्टिस मदन लोकुर की प्रतिक्रिया
भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही हैं तो मामला बेहद गंभीर है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर अदालत और सरकार दोनों को गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
भारत में क्या कहती हैं साइबर एजेंसियां?
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की निदेशक शिखा गोयल ने कहा कि Meta के प्लेटफॉर्म से सबसे अधिक टिपलाइन रिपोर्ट मिलती हैं। हालांकि उनके अनुसार इसका अर्थ यह नहीं कि केवल वहीं सबसे ज्यादा अपराध होते हैं, बल्कि यह भी संभव है कि उनके डिटेक्शन सिस्टम अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय हों।
मुंबई स्थित NGO द रति फाउंडेशन ने भी कहा कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की सबसे अधिक शिकायतें Meta के प्लेटफॉर्म से आती हैं। संस्था का कहना है कि अपराधी अक्सर Instagram से Telegram तक यूजर्स को ले जाकर मॉडरेशन से बचने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नेटवर्क के संस्थापक भुवन रिभु ने कहा कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन अपराध अक्सर संगठित गिरोहों द्वारा संचालित होते हैं और इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी क्षमता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
मामला क्यों है गंभीर?
भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का निर्माण, प्रचार, संग्रह, खरीद-बिक्री और प्रसार कानूनन गंभीर अपराध है। सोशल मीडिया कंपनियों की नीतियां भी ऐसे कंटेंट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती हैं।
BBC की यह पड़ताल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की विज्ञापन समीक्षा प्रणाली, एल्गोरिद्म और मॉडरेशन व्यवस्था पर नए सवाल खड़े करती है। हालांकि Meta और Telegram दोनों का कहना है कि वे ऐसे कंटेंट के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं और जांच में सामने आए मामलों पर भी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।



