प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़ेंगे उपचुनाव, बीजेपी के गढ़ में ‘पीके फैक्टर’ से बढ़ी सियासी हलचल

पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) अब पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने जा रहे हैं। यह फैसला रविवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में लिया गया।
चुनाव आयोग के अनुसार बांकीपुर समेत मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना की जाएगी।
बीजेपी के गढ़ से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर
बांकीपुर सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। पिछली विधानसभा में यहां से बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन ने जीत दर्ज की थी। नितिन नबीन के पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका मिलने के बाद यह सीट खाली हुई थी।
नितिन नबीन इस सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं और इसे बीजेपी के सबसे सुरक्षित शहरी क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में प्रशांत किशोर का यहां से चुनाव लड़ने का फैसला राजनीतिक हलकों में बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
पीके की सियासी रणनीति पर सवाल
प्रशांत किशोर का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव लड़ने से अंतिम समय में इनकार कर दिया था। उस समय उनकी पार्टी जन सुराज का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था और पार्टी कोई भी सीट जीतने में असफल रही थी।
इस बार पीके का सीधे चुनावी मैदान में उतरना उनके राजनीतिक भविष्य और जन सुराज की रणनीति दोनों के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
क्या है बांकीपुर का चुनावी गणित?
बांकीपुर सीट पटना के शहरी क्षेत्र में आती है और इसे कम मतदान वाली सीटों में गिना जाता है। पिछले चुनाव में यहां करीब 41% मतदान हुआ था। 2025 के चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को करीब 25% वोट शेयर मिला था, जबकि नितिन नबीन ने लगभग 52 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी उदासीनता (Urban Apathy) यहां एक बड़ी चुनौती है, लेकिन साथ ही यह किसी नए चेहरे के लिए अवसर भी बन सकती है।
बीजेपी के सामने नई चुनौती
बीजेपी के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है क्योंकि यह सीट न सिर्फ पार्टी का गढ़ है, बल्कि यहां से उसके बड़े नेता भी जुड़े रहे हैं। ऐसे में बीजेपी को न सिर्फ जीत बनाए रखनी होगी बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करने का दबाव भी रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रशांत किशोर यहां अच्छा प्रदर्शन करते हैं, भले ही वे जीत न भी पाएं, तो भी यह उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता को मजबूत कर सकता है।
प्रशांत किशोर का जनता से सीधा संदेश
बांकीपुर में जनसभा के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता को अपनी नाराजगी वोट के जरिए जतानी चाहिए। उन्होंने कहा,
“मोदी जी आपसे बात करने नहीं आएंगे, पांच साल बाद भी नहीं आएंगे। अगर आपको लगता है कि आपके क्षेत्र में सही काम नहीं हुआ है तो बीजेपी को हराइए।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं बल्कि जनता की आवाज को राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का माध्यम है।
जन सुराज पार्टी की चुनौती
2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी 243 सीटों में से किसी पर भी जीत दर्ज नहीं कर सकी थी और उसके अधिकांश उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे।
पार्टी को कुल करीब 3.4% वोट शेयर मिला था, जिसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाए थे कि क्या जन सुराज वास्तव में बिहार की राजनीति में प्रभाव बना पाएगी।
क्या बन पाएंगे ‘किंगमेकर’?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर का यह कदम दो तरह से देखा जा रहा है—या तो यह उनकी राजनीतिक वापसी की शुरुआत है, या फिर बीजेपी के गढ़ में एक प्रतीकात्मक लड़ाई।
वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, पीके का लक्ष्य केवल जीत नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को बनाए रखना भी हो सकता है। वहीं बीजेपी के लिए यह सीट एक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है।
नतीजों पर टिकी नजर
अब सभी की नजरें 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को आने वाले परिणामों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशांत किशोर बीजेपी के इस मजबूत किले में कोई सेंध लगा पाते हैं या फिर यह मुकाबला केवल चर्चा तक सीमित रह जाता है।



