मिशन क्लीन वोटर लिस्ट’ या विपक्षी घमासान? 13 राज्यों में 6 करोड़ वोटर आउट; समझें क्या है चुनाव आयोग का SIR अभियान

नई दिल्ली। भारत में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की दिशा में निर्वाचन आयोग (ECI) इस समय अपने सबसे बड़े और कड़े अभियानों में से एक को अंजाम दे रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चल रहे विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत देश के 13 राज्यों से अब तक लगभग 6 करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं।
ताजा अपडेट के अनुसार, आयोग ने चार और राज्यों (ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की है, जहां 22 लाख से अधिक लोगों के नाम डिलीट किए गए हैं। जहां एक ओर आयोग इसे चुनावी शुचिता के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इस पर ‘मनमानी’ का आरोप लगा रहे हैं।
क्या है SIR अभियान और क्यों मचा है सियासी बवाल?
SIR (विशेष गहन संशोधन) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाना और ‘फर्जी’ या ‘दोहरी’ प्रविष्टि वाले मतदाताओं की वैधता जांचना है।
- सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी: मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने एक अहम फैसले में इस अभियान को पूरी तरह वैध ठहराते हुए कहा था कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision) का पूरा अधिकार है।
- विपक्ष की घेराबंदी: इस कानूनी मंजूरी के बावजूद, ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में शामिल 23 विपक्षी पार्टियों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि नाम हटाने की यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसमें ‘मनमानी’ की जा रही है।
आंकड़ों की नजर से: किस राज्य में कितनी बड़ी ‘कटौती’?
आयोग द्वारा चलाए गए इस अभियान का सबसे बड़ा असर उत्तर और पूर्वी भारत के बड़े राज्यों में देखने को मिला है। अब तक कटे नामों का राज्यवार ब्यौरा इस प्रकार है:
| राज्य | हटाए गए मतदाताओं (वोटर्स) की संख्या |
| बिहार | 65 लाख |
| पश्चिम बंगाल | 37 लाख |
| उत्तर प्रदेश | 25 लाख |
| ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम (नए ड्राफ्ट में) | 22 लाख से अधिक |
| कुल (13 राज्यों को मिलाकर) | लगभग 6 करोड़ |
अगले चरण में कहां चल रहा है ‘ऑपरेशन क्लीन’?
चुनाव आयोग इस समय देश के 16 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने के लिए तेजी से काम कर रहा है।
- प्रमुख राज्य: आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश।
- केंद्र शासित प्रदेश: दिल्ली (NCT), चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, तथा दमन और दीव।
आम जनता के लिए क्या है राहत की बात?
नाम कटने की खबरों के बीच चुनाव आयोग ने साफ किया है कि आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। जिन भी लोगों के नाम इस ‘ड्राफ्ट लिस्ट’ से हटाए गए हैं, उन्हें अपना नाम दोबारा शामिल कराने का एक अंतिम अवसर (मौका) दिया जाएगा।
नागरिक अपनी पात्रता के दस्तावेज जमा कर फिर से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा सकते हैं। इस दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही इन राज्यों की अंतिम (Final) मतदाता सूची जारी की जाएगी।
बड़ा सवाल: 6 करोड़ वोटरों का नाम लिस्ट से बाहर होना भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे बड़ी सफाई प्रक्रियाओं में से एक है। लेकिन देखना यह होगा कि आगामी चुनावों से ठीक पहले विपक्ष के ‘पारदर्शिता’ वाले आरोपों का चुनाव आयोग किस तरह जवाब देता है।
