‘व्हाट इज लव विद कवि किशन’ विवाद में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने दिए ये आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता और भाजपा सांसद रवि किशन के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) की सुरक्षा को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम, छवि और पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करने वाले आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने Google, Meta और X को दिए सख्त निर्देश
जस्टिस ज्योति सिंह की अदालत ने स्पष्ट कहा कि रवि किशन की छवि या नाम का उपयोग करके बनाई गई किसी भी गलत, मानहानि करने वाली या अश्लील सामग्री को सोशल मीडिया से हटाया जाए।
कोर्ट ने गूगल, मेटा और X Corp जैसी बड़ी टेक कंपनियों को निर्देश दिया है कि:
- किसी भी शिकायत या आदेश के बाद संबंधित कंटेंट को 72 घंटे के भीतर हटाया जाए
- यदि कंटेंट अपलोड करने वाला व्यक्ति या वेबसाइट तय समय में उसे नहीं हटाती, तो प्लेटफॉर्म खुद कार्रवाई करे
- कोर्ट के 2 जुलाई के आदेश के बाद ऐसे सभी लिंक तुरंत ब्लॉक किए जाएं
AI और फर्जी कंटेंट पर भी सख्ती
कोर्ट में दाखिल याचिका में रवि किशन ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर उनके नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर AI-जनरेटेड अश्लील और अपमानजनक वीडियो बनाए और फैलाए जा रहे हैं।
इसके अलावा एक रेडियो सेगमेंट “व्हाट इज लव विद कवि किशन” पर भी आपत्ति जताई गई थी। रवि किशन का कहना है कि इस कार्यक्रम में उनके नाम और पहचान का व्यावसायिक उपयोग उनकी अनुमति के बिना किया गया।
पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन माना गया
कोर्ट ने माना कि किसी भी व्यक्ति की पहचान, नाम और छवि का बिना सहमति व्यावसायिक इस्तेमाल उसके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है। इसलिए इस तरह की सामग्री पर रोक लगाना जरूरी है।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि भविष्य में भी किसी प्रकार का AI-जनरेटेड या एडिटेड कंटेंट, जो उनकी छवि को नुकसान पहुंचाता हो, उसे प्रसारित न किया जाए।
कई पक्षों पर लागू होगा आदेश
यह अंतरिम आदेश केवल कुछ प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें:
- अज्ञात यूजर्स (John Does)
- वेबसाइट डोमेन संचालक
- और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स
भी शामिल हैं, जो इस तरह का कंटेंट अपलोड या प्रसारित कर रहे हैं।
अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर तय की है। तब तक सभी संबंधित प्लेटफॉर्म्स को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
निष्कर्ष
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला डिजिटल युग में सेलिब्रिटी पर्सनैलिटी राइट्स और AI-जनरेटेड कंटेंट के दुरुपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी और सख्त हो गई है।



