होर्मुज संकट से सबक: भारत बनाएगा 30 दिन का LPG रिज़र्व, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई ढाल

अमेरिका-ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी ने वैश्विक क्रूड ऑयल और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर डाला था। इस संकट का असर भारत पर भी पड़ा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अब इसी अनुभव से सीख लेते हुए भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब देश में 30 दिन का स्ट्रैटेजिक LPG रिज़र्व बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। इसका मकसद किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।
BPCL बढ़ाएगा स्टोरेज क्षमता, होगा बड़ा निवेश
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) अपनी LPG स्टोरेज क्षमता को लगभग 200 हजार मीट्रिक टन (TMT) से बढ़ाकर 340 TMT करने की तैयारी में है। इस विस्तार के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
इसी तरह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) भी अपनी-अपनी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह पूरा कदम देश में ऊर्जा भंडारण ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
30 दिन का रिज़र्व बनाने की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार मोटे तौर पर 30 दिन की LPG इन्वेंट्री तैयार करने पर विचार कर रही है। हालांकि, स्टॉक की सटीक मात्रा अभी तय नहीं की गई है और यह देश की खपत, आयात क्षमता और सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन पर निर्भर करेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इसका उद्देश्य किसी भी तरह के सप्लाई शॉक से घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं को बचाना है।
भारत की आयात निर्भरता और होर्मुज का संकट
भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिसमें करीब 90% सप्लाई खाड़ी देशों से होकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान जब होर्मुज मार्ग बाधित हुआ था, तब भारत के LPG आयात पर असर पड़ा और सरकार को कुछ समय के लिए कमर्शियल व इंडस्ट्रियल सेक्टर में सप्लाई सीमित करनी पड़ी थी।
मौजूदा स्थिति: सिर्फ 18 दिनों का कवर
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में फिलहाल 214 LPG बॉटलिंग प्लांट काम कर रहे हैं। इनमें औसतन केवल 4 से 7 दिनों का स्टॉक रहता है।
अगर इसमें इम्पोर्ट टर्मिनल और अन्य स्टोरेज सुविधाएं भी जोड़ दी जाएं, तब भी देश के पास औसतन सिर्फ 18 दिनों का ही LPG कवर उपलब्ध है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि 30 दिन का रणनीतिक रिज़र्व भारत को वैश्विक ऊर्जा संकटों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करेगा। इससे न केवल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि इंडस्ट्रियल सप्लाई भी स्थिर रहेगी।
इस योजना को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सप्लाई चेन सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में देश की रणनीतिक क्षमता को और मजबूत कर सकता है।



