ICC Hall of Fame 2026: जन्मदिन पर सौरव गांगुली को दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान! आईसीसी ‘हॉल ऑफ फेम’ में शामिल होंगे ‘दादा’

Sourav Ganguly ICC Hall of Fame: भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे निर्भीक और क्रांतिकारी कप्तानों में से एक सौरव गांगुली आज (8 जुलाई) अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर जहां पूरा खेल जगत और करोड़ों फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें बधाइयां दे रहे हैं, वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ को उनके जन्मदिन पर दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट सम्मान देने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरव गांगुली को उनके शानदार और ऐतिहासिक करियर के लिए ICC ‘हॉल ऑफ फेम’ (Hall of Fame) में शामिल किया जा रहा है।

आईसीसी के इस सबसे प्रतिष्ठित और एलीट क्लब में शामिल होते ही सौरव गांगुली एक बेहद खास सूची में जगह बना लेंगे:

  • देश के 12वें खिलाड़ी: गांगुली खेल के इस सबसे बड़े क्लब में जगह बनाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर बनेंगे।
  • 10वें पुरुष क्रिकेटर: अगर भारत के पुरुष क्रिकेटर्स की बात की जाए, तो आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले वह देश के सिर्फ 10वें पुरुष खिलाड़ी होंगे।
  • अमिट विरासत: इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास के इतने सालों बाद भी ‘दादा’ को मिला यह सम्मान साबित करता है कि वर्ल्ड क्रिकेट में उनके योगदान का कद आज भी कितना बड़ा है।

सौरव गांगुली ने महज 20 साल की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था और लगातार 16 सालों तक टीम इंडिया की सेवा की। साल 2008 में क्रिकेट को अलविदा कहने वाले गांगुली के आंकड़े आज भी उनकी महानता की गवाही देते हैं:

सौरव गांगुली को सिर्फ उनकी कप्तानी के जीत-हार के रिकॉर्ड के लिए याद नहीं किया जाता, बल्कि वो एक ऐसे कप्तान थे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की सोच को बदल कर रख दिया।

विदेशी सरजमीं पर जीत का जज्बा: 90 के दशक में भारतीय टीम अपने घर में तो शेर थी, लेकिन विदेशी पिचों पर अक्सर घुटने टेक देती थी। गांगुली ने कप्तानी संभालते ही इस डर को खत्म किया। उन्होंने टीम और देश को यह विश्वास दिलाया कि टीम इंडिया विदेशी सरजमीं पर भी विरोधी टीम की आंख में आंख डालकर मैच जीत सकती है।

युवाओं के ‘गॉडफादर’ बने दादा

गांगुली एक बेहतरीन कप्तान होने के साथ-साथ हुनर की पहचान करने वाले जबरदस्त पारखी भी थे। उन्होंने संकट के समय युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, जहीर खान, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और आशीष नेहरा जैसे युवा खिलाड़ियों का खुलकर सपोर्ट किया, जो आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के स्तंभ बने। साल 2008 में संन्यास के बाद भी गांगुली बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष और बाकी प्रशासनिक भूमिकाओं के जरिए इस खेल को आगे बढ़ाते रहे।

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