क्या ईरान के आगे झुक गए ट्रंप? सर्वे रिपोर्ट का दावा- होर्मुज स्ट्रेट से न्यूक्लियर डील तक ‘बैकफुट’ पर अमेरिका

अमेरिका और ईरान के बीच थमी जंग के बाद अब दावों और हकीकतों का नया दौर शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत और हालिया अमेरिकी सर्वे रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में न तो सत्ता परिवर्तन हुआ और न ही उसका शासन झुका। उल्टा, जो होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) कल तक पूरी दुनिया के लिए मुफ़्त था, अब वहां ईरान और ओमान मिलकर नया ‘टोल टैक्स’ वसूलने की तैयारी में हैं।
ट्रंप भले ही अमेरिकी जनता के बीच जीत का नैरेटिव गढ़ रहे हों, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर वह बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं। आइए जानते हैं उस सर्वे रिपोर्ट के 4 बड़े बिंदु, जो ट्रंप के दावों की हवा निकाल रहे हैं।
1. होर्मुज स्ट्रेट: कल तक जो ‘फ्री’ था, अब वहां टैक्स वसूलेगा ईरान!
ट्रंप प्रशासन जिस समझौते को अपनी सबसे बड़ी कामयाबी बता रहा है, उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी ‘होर्मुज स्ट्रेट’ है।
- नया प्लान: ईरान और ओमान ने मिलकर IMO (International Maritime Organization) से मंज़ूरी लेकर एक वैकल्पिक क्रॉसिंग रूट तैयार किया है।
- संप्रभुता का दावा: हालांकि शुरुआत में यह रास्ता मुफ़्त होगा, लेकिन भविष्य में ईरान-ओमान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाजों पर ‘सुरक्षित आवाजाही शुल्क’ (Toll Fee) लगा सकते हैं।
- अमेरिका की टेंशन: इस नई व्यवस्था से बौखलाए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) आनन-फानन में यूएई, कुवैत और बहरीन के दौरे पर हैं। रुबियो ने साफ कहा है कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर ईरान का कोई भी टैक्स स्वीकार नहीं करेगा।
2. ‘परमाणु कार्यक्रम रुकने का दावा फेक’ – ईरान ने किया खंडन
डोनाल्ड ट्रंप रैलियों में दावा कर रहे हैं कि ईरान अब कभी न्यूक्लियर पावर नहीं बन पाएगा क्योंकि उसने अपनी परमाणु साइट्स की जांच IAEA से कराने की बात मान ली है। लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई का बयान: “परमाणु कार्यक्रम को लेकर हमारी कोई नई बातचीत नहीं हुई है। जब तक ‘आर्टिकल 13’ की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक IAEA के निरीक्षण का कोई सवाल ही नहीं उठता।”
3. मिसाइल प्रोग्राम पर डिगे नहीं पेजेश्कियान: ‘इसके बिना तो इजराइल हमें बर्बाद कर देता’
पेनसिलवेनिया की रैली में ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान का मिसाइल प्रोग्राम भी ख़त्म करवा दिया है। इसके जवाब में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
- मिसाइल प्रोग्राम अमेरिका के साथ हुए समझौते का हिस्सा कभी था ही नहीं और न कभी होगा।
- अगर ईरान के पास मिसाइल डिफेंस न होता, तो अमेरिका और इजराइल मिलकर अब तक ईरान को तबाह कर चुके होते।
4. 47 साल पुराने प्रतिबंध हटे, $300 बिलियन का फंड; जीता कौन?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि युद्ध टालने के लिए अमेरिका को ईरान की लगभग हर शर्त माननी पड़ी है।
- अमेरिका को ईरान पर लगे 47 साल पुराने कड़े प्रतिबंध हटाने पड़े हैं।
- ईरान की सीज की गई संपत्तियों को बहाल कर दिया गया है।
- ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 बिलियन डॉलर के फंड का रास्ता साफ करना पड़ा है।
सिर्फ बयानों में जंग जीत रहे हैं ट्रंप?
जब्त फंड की वापसी, प्रतिबंधों का हटना और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का बढ़ता दबदबा—ये तमाम परिस्थितियां इशारा करती हैं कि ट्रंप इस समझौते में कमज़ोर साबित हुए हैं। यही वजह है कि अमेरिकी जनता के बीच अपनी साख बचाने के लिए ट्रंप बार-बार बयान बदल रहे हैं और केवल बयानों के सहारे इस रणनीतिक हार को ‘महाजीत’ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
