G7 Summit 2026: भारतीय नाविकों की मौत के बीच पीएम मोदी ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा, दुनिया से की बड़ी अपील

एवियन (फ्रांस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री व्यापार पर पड़े असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ओमान तट के पास एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष का दुनिया पर असर
जी-7 सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों की कीमत सिर्फ युद्धरत देशों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कई मित्र देशों को जान-माल का भारी नुकसान झेलना पड़ा है और इस संघर्ष में भारत के नागरिकों की भी जान गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियां प्रभावित होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए वहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
नाविकों की सुरक्षा को बताया सामूहिक दायित्व
पीएम मोदी ने कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया के देशों को आपस में जोड़ने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है और इसमें काम करने वाले नाविक वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित होने चाहिए ताकि जहाजों पर काम करने वाले लोग बिना किसी डर और खतरे के अपना काम कर सकें। अगर समुद्री रास्ते सुरक्षित नहीं होंगे तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ेगा।
‘सेटेबेलो’ हमले के बाद बढ़ी चिंता
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान 9 जून को ओमान के तट के पास हुए उस हमले के बाद आया है, जिसमें कमर्शियल जहाज ‘सेटेबेलो’ को निशाना बनाया गया था। इस जहाज पर 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी, जबकि 21 अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया था।
इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में भारतीय क्रू वाले दो अन्य जहाजों पर भी हमले हुए थे। हालांकि उन घटनाओं में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। इन घटनाओं के बाद भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी।
दुनिया पहले से ज्यादा जुड़ी हुई है: मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर निर्भर हो चुकी है। किसी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि अब केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती।
उन्होंने कहा कि डेटा, तकनीक, पूंजी और मानव संसाधन पूरी दुनिया को जोड़ते हैं। ऐसे में वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग और विश्वास बेहद जरूरी है।
‘सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है विश्वास’
पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति कोई प्राकृतिक संसाधन, तकनीक या बाजार नहीं है, बल्कि देशों के बीच आपसी विश्वास है। उन्होंने कहा कि दुनिया को भरोसा होना चाहिए कि तकनीक और सप्लाई चेन का इस्तेमाल मानवता के हित में होगा, न कि उन्हें दबाव बनाने या हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
उन्होंने वैश्विक संस्थाओं को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की भी जरूरत बताई, ताकि सभी देशों की आकांक्षाओं और हितों को समान महत्व मिल सके।
ट्रंप से मुलाकात भी रही चर्चा में
जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात की। ‘ऑपरेशन सिंदूर’, व्यापारिक टैरिफ और हाल के कुछ कूटनीतिक मुद्दों के बाद दोनों नेताओं की यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी।
दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी रही।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने अमेरिका का नाम लेने से परहेज किया। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी सरकार के रुख की आलोचना की।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि भारत ने अपने नागरिकों की मौत का मुद्दा संबंधित देशों के समक्ष मजबूती से उठाया है और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
क्यों अहम है पीएम मोदी का बयान?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में अस्थिरता न केवल ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करती है, बल्कि दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है। ऐसे में जी-7 जैसे वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाना रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



