Thursday - 4 March 2021 - 2:49 PM

भारतीय चिकित्सक संघ की डॉ. हर्ष वर्धन के प्रति नाराजगी की वजह क्या है?

जुबिली न्यूज डेस्क

भारतीय चिकित्सक संघ (आईएमए) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन से नाराज है। सोमवार को आईएमए ने एक प्रेस रिलीज जारी कर उनसे एक के बाद एक कई सवाल पूछे हैं।

इतना ही नहीं आईएमए की ओर से जारी बयान में डॉ. हर्ष वर्धन पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के कोड ऑफ कंडक्ट की अवहेलना करने का अभियोग भी लगाया गया है।

भारतीय चिकित्सक संघ की नाराजगी यूं ही नहीं है। दरअसल शुक्रवार को बाबा रामदेव की कंपनी द्वारा कोरोना की दवा कोरोनिल लांच किया गया। इस मौके पर बाबा रामदेव द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन व केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे।

आईएमए का कहना है कि ”नियम कहते हैं कि कोई भी डॉक्टर किसी दवा को प्रमोट नहीं कर सकता है, लेकिन केंद्रीय मंत्री जो कि स्वयं एक डॉक्टर हैं, उनके द्वारा दवा को प्रमोट किया जाना चौंकाता है।”

इस मामले को भारतीय चिकित्सक संघ ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया तक ले जाने का ऐलान किया है। अब सवाल उठता है कि आखिर भारतीय चिकित्सक संघ की डॉ. हर्ष वर्धन के प्रति नाराजगी की वजह क्या है?

क्या है मामला

शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बाबा रामदेव द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन शामिल हुए थे।

पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा कि उनके संस्थान द्वारा तैयार की गई कोरोनिल से जुड़े शोध पत्रों को कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित किया गया है। इस मौके पर डॉ. हर्ष वर्धन और नितिन गड़करी ने कोरोनिल के साथ तस्वीरें खिंचवाईं।

प्रेस कांफ्रेंस के बाद बाबा रामदेव ने कई बड़े-बड़े दावे किए। अलग-अलग टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ की ओर से दुनिया के 154 देशों में भेजने की मान्यता भी मिल गई है।

लेकिन डब्ल्यूएचओ की ओर से इस दावे का खंडन किया गया है। इसके बाद से ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन आईएमए के निशाने पर आ गए।

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रामदेव के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी पर आईएमए सवाल उठा रहा है।

भारतीय चिकित्सक संघ के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा एक अवैज्ञानिक दवा को जारी किया जाना और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तत्काल उसे खारिज किया जाना इस देश के लोगों का अपमान है।

आईएमए ने पूछा सवाल

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से रामदेव के दावे का खंडन सामने आने के बाद आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को आड़े हाथ लिया है। बीबीसी के मुताबिक आईएमए ने डॉ. हर्ष वर्धन से ये सवाल पूछे हैं-

  • देश के स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते, ये कितना उचित और तार्किक है कि आप इस तरह की झूठी जानकारी पूरे देश के सामने रखें?
    देश के स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते, ये कितना न्यायसंगत है कि आप झूठी जानकारी के साथ अवैज्ञानिक उत्पाद को देश की जनता के सामने जारी करें?
  • देश के स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते, ये कितना नैतिक है कि आप किसी उत्पाद को अनैतिक, गलत और झूठे ढंग के साथ पूरे देश के सामने पेश करें?
  • देश के स्वास्थ्य मंत्री और आधुनिक मेडिसिन डॉक्टर होने के नाते, आपका एक अवैज्ञानिक उत्पाद को देश की जनता के समक्ष पेश करना कितना नैतिक है?
  • देश के स्वास्थ्य मंत्री और आधुनिक मेडिसिन डॉक्टर होने के नाते, क्या आप स्वयं द्वारा जारी किए गए तथाकथित एंटी-कोरोना उत्पाद के तथाकथित क्लिनिकल ट्रायल, अगर हुए हैं तो, उनका टाइम फ्रेम और टाइम लाइन स्पष्ट कर सकते हैं?
  • देश के स्वास्थ्य मंत्री और आधुनिक मेडिसिन डॉक्टर होने के नाते, क्या आप स्वयं द्वारा जारी किए गए तथाकथित एंटी-कोरोना उत्पाद के तथाकथित क्लिनिकल ट्रायल के लिए डबल ब्लाइंड और सिंगल ब्लाइंड क्लिनिकल ट्रायल में शामिल मरीज़ों के बारे में स्पष्ट कर सकते हैं?
  • देश के स्वास्थ्य मंत्री और आधुनिक मेडिसिन डॉक्टर होने के नाते, क्या आप स्वयं द्वारा जारी किए गए तथाकथित एंटी-कोरोना उत्पाद के तथाकथित क्लिनिकल ट्रायल के लिए डबल ब्लाइंड और सिंगल ब्लाइंड क्लिनिकल ट्रायल में शामिल मरीज़ों के बारे में स्पष्ट कर सकते हैं? क्या इन मरीजों से सुविज्ञ सहमति ली गई थी?
  • लांच के बाद एक साक्षात्कार में बाबा रामदेव ने आधुनिक चिकित्सा पद्धति की आलोचना करते हुए इसे मेडिकल टेरेरिज़्म की संज्ञा दी। देश के स्वास्थ्य मंत्री और आधुनिक मेडिसिन डॉक्टर होने के नाते, क्या आप बाबा रामदेव के इन बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान पर स्पष्टीकरण दे सकते हैं?
  • आपकी उपस्थिति में बताया गया है कि इस दवा को डीजीसीआई द्वारा अनुमति मिल गई है, ये किस आधार पर किया गया?
  • आईएमए ने ये सवाल भी उठाया कि अगर कोरोनिल, कोरोना से बचाव में इतनी प्रभावशाली है तो भारत सरकार टीकाकरण पर 35 हजार करोड़ रुपये क्यों खर्च कर रही है।

विवादों के घेरे में आई प्रेस कॉन्फ्रेंस

विवादों के घेरे में आई प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामदेव ने दावा किया कि कोरोनिल के संदर्भ में नौ शोध पत्र दुनिया के मशहूर जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं और 16 शोध पत्र कतार में हैं।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “अभी तक आयुर्वेद में होता था कि ये दवाई लो, हम ले लेते थे क्योंकि विश्वास था। फायदा भी होता था। पर अब इसका वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं विश्लेषण करके इसके शोध पत्र के साथ इसका प्रेजेंटेशन करने का काम भी इन्होंने (आचार्य बालकृष्ण) किया है।”

वहीं डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि आयुर्वेद की क्षमताओं को लेकर किसी भी तरह के शक की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर ये भी लिखा है कि ‘आयुर्वेद को लेकर जो सपना बाबा रामदेव का है, वही भारत सरकार का सपना है’।

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डब्ल्यूएचओ ने खारिज किया दावा

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से इस बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है। डब्ल्यूएचओ के साउथ ईस्ट एशिया के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा गया, “विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड – 19 के इलाज के लिए किसी भी पारंपरिक दवा के प्रभाव की समीक्षा नहीं की है और न ही किसी दवा को प्रमाणित किया है।”

डब्ल्यूएचओ की ओर से स्पष्टीकरण आने के बाद से रामदेव के दावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विवाद खड़ा होने के बाद आचार्य बाल कृष्ण ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करके अपनी कंपनी का पक्ष रखा है।

बाल कृष्ण ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, “हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं ताकि किसी तरह के भ्रम की स्थिति न रहे।

कोरोनिल को जो डब्ल्यूएचओ -जीएमपी कंप्लाइंट सीओपीपी सर्टिफिकेशन दिया गया है, वो डीजीसीआई, भारत सरकार ने जारी किया है। ये स्पष्ट है कि डब्ल्यूएचओ किसी दवा को स्वीकृति या अस्वीकृति नहीं देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन पूरी दुनिया के लोगों के लिए एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य बनाने की दिशा में काम करता है।”

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