UMEED पोर्टल से वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण: देशभर में 7.99 लाख से अधिक संपत्तियां दर्ज

वक्फ संशोधन कानून लागू होने के बाद देशभर की वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए केंद्र सरकार ने UMEED (Unified Waqf Management Empowerment, Efficiency and Development) पोर्टल शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की सटीक संख्या, स्थिति और स्वामित्व का पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना है।
संसद में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री का बयान
27 जुलाई 2026 को राज्यसभा में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए:
- कुल पंजीकृत संपत्तियां: 21 जुलाई 2026 तक देशभर की 7.99 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियों की जानकारी UMEED पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है।
- बिहार में अतिक्रमण: बिहार में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की कुल 574 संपत्तियों पर अवैध कब्जे की जानकारी संसद को दी गई।
UMEED पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और डिजिटलीकरण के लिए बनाया गया एक एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है।
डेटा अपलोड करने की 3-स्तरीय प्रक्रिया:
- मेकर (Maker): संपत्ति का विवरण और दस्तावेज़ पोर्टल पर दर्ज करता है।
- चेकर (Checker): दर्ज किए गए विवरण और दस्तावेजों की जांच करता है।
- अप्रूवर (Approver): सही पाए जाने पर अंतिम स्वीकृति देता है, जिसके बाद डेटा आधिकारिक तौर पर स्वीकृत माना जाता है।
वक्फ संपत्तियों के प्रमुख आंकड़े (21 जुलाई 2026 तक)
राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति
- कुल दर्ज संपत्तियां: 7,99,027
- अंतिम रूप से स्वीकृत (Approved): 6,17,192
- प्रक्रियाधीन/लंबित: 1,81,835
सर्वाधिक वक्फ संपत्तियों वाले राज्य:
| राज्य | वक्फ संपत्तियों की संख्या |
| उत्तर प्रदेश (शिया + सुन्नी) | 1,60,870 |
| पश्चिम बंगाल | 1,32,395 |
| केरल | 79,905 |
| महाराष्ट्र | 71,922 |
| तेलंगाना | 63,984 |
| कर्नाटक | 58,845 |
बिहार में वक्फ संपत्तियों की स्थिति
बिहार में दो अलग-अलग बोर्ड कार्यरत हैं:
- शिया वक्फ बोर्ड: कुल 6,312 संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज की गईं, जिनमें से 5,955 को मंजूरी मिल चुकी है। 63 संपत्तियों पर अवैध कब्जा है।
- सुन्नी वक्फ बोर्ड: कुल 11,454 संपत्तियां दर्ज की गईं, जिनमें से 6,700 स्वीकृत हैं। 511 संपत्तियों पर अवैध कब्जा है।
- कार्रवाई: वक्फ कानून की धारा 54 के तहत कुल 574 अवैध कब्जों को हटाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई?
संशोधन कानून के अनुसार सभी राज्य बोर्डों को 6 महीने के भीतर डेटा अपलोड करना था। हालांकि, पुराने व अधूरे दस्तावेज, भू-विवाद, कर्मचारियों की कमी और तकनीकी बाधाओं के कारण कई राज्य ऐसा नहीं कर सके। वक्फ ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालयों ने उचित कारण मिलने पर इसकी समय-सीमा बढ़ा दी है।
कानूनी नियम: Waqf Act, 1995 की धारा 32 के तहत संपत्तियों की निगरानी की जिम्मेदारी राज्य बोर्ड की होती है, और धारा 54 के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी वही करते हैं।
UMEED पोर्टल से मिलने वाले लाभ
- केंद्रीय डेटाबेस: देशभर की संपत्तियों का एक ही स्थान पर पारदर्शी रिकॉर्ड।
- धोखाधड़ी पर लगाम: फर्जी दावों और दस्तावेजों में हेरफेर की संभावना खत्म।
- अतिक्रमण की पहचान: अवैध कब्जों को चिह्नित करना और कानूनी कार्रवाई आसान।
- विवादों का जल्द निपटारा: अदालतों और ट्रिब्यूनल को मामलों के समाधान में सहूलियत।

