धर्म के नाम पर …..क्या कुछ?


स्मिता जैन” रेवा”
धार्मिक क्षेत्र जहां बहुसंख्यक जनता की भावनाएं धार्मिकता के साथ जुड़ी हुई होती है वह तीर्थ बन जाता है और उस तीर्थ में सिर्फ पवित्रता और सुचिता का स्थान होता है।
भारतीय संस्कृति में कहते हैं कि उस स्थान पर साक्षात ईश्वर का निवास हो जाता है और उस स्थान का कण कण पवित्र और पूज्यनीय हो जाता है। लेकिन वर्तमान में हो रही घटनाओं को देखकर चाहे वह अयोध्या में चंदा चोरी हो, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड,गुजरात का अंबाला ,मध्य प्रदेश के मंदिर या फिर खजुराहो के पास स्थित धार्मिक स्थल वर्तमान में हर कहीं धर्म के नाम पर लूट का साम्राज्य मचा हुआ है किसी भी तरह से आम जनता के धार्मिक भावनाओं को भड़काईये और जब बहुत अधिक जनता आने लगे एवं उनसे अच्छी कमाई होने लगे तो आए हुए रूपयों से वहां की जनता को डराना ,धमकाना, मारना, गली गलोच करना, बहन बेटियों के साथ बलात्कार करना एवं मार डालना और भी न जाने कितने अत्याचार करना।
क्या दुनिया में कोई भी धर्म अगर सफल है तो वह क्या यही सिखाता है कि आम जनता को ठगों और लूटो एवं अपनी तिजोरिया भरो।
अगर ऐसा है तो आने वाले भविष्य में दुनिया में धर्म और आस्तिकता खत्म हो जाएगी उसके स्थान पर सिर्फ नास्तिकता आम जनता में समाहित हो जाएगी जिससे इस संसार में संस्कार एवं एकता ,प्रेम, भाईचारा जैसे शब्द खत्म हो जाएंगे और हर व्यक्ति सिर्फ उपभोक्ता बन जाएगा और लूटने, कमाने ,खाने के लिए जीवन जीने लगेगा और संस्कृति जैसा शब्द समाज से नष्ट हो जाएगा।
क्या वर्तमान सत्ताधारी नेता और धार्मिक लोग इस भारत भूमि को जो कि सदियों से धर्म के लिए मान्य रही है और संपूर्ण विश्व में इसका अपना विशेष महत्व रहा है क्योंकि इसी धरती पर आदिनाथ से लेकर महावीर,गौतम बुद्ध,महादेव , श्री राम ,श्री कृष्णा विवेकानंद, आचार्य विद्यासागर, शांति सागर, महात्मा गांधी आदि अनेक महान तपस्वियों ने इस भारत भूमि को अपना संपूर्ण जीवन दिया और आज अमर है और हम सबको उनकी तरह है बनने की प्रेरणा मिलती है।
आजकल लगता है यह सभी कुछ धार्मिक कर्मकांड और धर्म को बढ़ावा इसलिए दिया जा रहा है वर्तमान समय में ताकि अनैतिक रूप से कमाई गई पूंजी ,सोना, चांदी रत्न ,आभूषण एवं जमीन जायदाद को लूटा जा सके और उससे जुड़े लोगों को आमदनी का एक गैरकानूनी तरीका मिल जाए ।
कहते हैं कि धार्मिक कार्यों में कोई टैक्स नहीं लगता ना देने वाले को ,ना लेने वाले को तो इतना आनाप-सनाप कमाई का जरिया कोई छोड़ना चाहेगा क्या और यह अनाप-शनाप कमाई जब कुछ ही सालों में आदमियों को शून्य से शिखर पर बैठा देती है तो उनका दिमाग खराब हो जाता है और वह इस धरती का सम्राट समझने लगता है अपने आप को ।
लेकिन वह भूल जाता है कि इस धरती पर उसके जैसे ना जाने कितने सनकी आए और आकर चले गए शायद पूरी आयु भी जी कर नहीं जा पाते हैं क्योंकि कहते हैं कि रुपया अपने साथ दुआ और बद्दुआ दोनों ही लाता है।
भारत की संस्कृति में धर्म करने वाले लोगों का काम धर्म करना होता था और राजनीति करने वाले लोगों का काम राजनीति करना होता था लेकिन वर्तमान में धर्म करने वाले लोगों ने ही राजनीति और उद्योगपति बनने का बीड़ा उठा लिया है इस चक्कर में वह घनचक्कर हो गए हैं और समाज में उनकी गलत छवि बनती जा रही है ।
यह स्वयंभू लोग और उनके गॉडफादर आज समाज के लिए एक कोढ बनते जा रहे हैं ,नासूर बनते जा रहे हैं और धर्म जो इंसान को संस्कार देता है वह अब कुसंस्कारित करने लगा है क्योंकि धर्म का उपदेश रहने वाले लोग ही अब संस्कारी नहीं रह गई उनके ऊपर कई प्रकार के केस जैसे हिंसा चोरी और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगे हुए हैं लेकिन वह सत्ता का आश्रय पाकर निश्चित होकर अपना गैर कानूनी काम कर रहे हैं ।
भारत की भूमि में अतीत से लेकर वर्तमान तक न जाने कितने तीर्थ क्षेत्र विकसित हुए और हो रहे लेकिन कुछ तीर्थ क्षेत्र को छोड़ दे तो सभी जगह धर्म है,संस्कार है।तभी तो आम जनता उसको स्वीकार किए हुए हैं ।
लेकिन कुछ लोग जो आस्तिकता का आवरण ओढ़े हुए हैं वास्तव में वह कट्टर नास्तिक लोग हैं और उनके लिए ईश्वर की मूर्ति ईश्वर नहीं सिर्फ आमदनी का एकमात्र जरिया है।
ऐसी स्थिति में समाज के जागरूक लोगों को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए और निष्पक्ष होकर आम जनता के लिए काम करना चाहिए क्योंकि धर्म जैसा संवेदनशील तत्व संपूर्ण समाज, देश और विश्व को बना भी सकता है और पतन भी कर सकता है।
अतः हर किसी को अपनी नैतिकता का निर्वाहन करना चाहिए क्योंकि धर्म के द्वारा दिए गए संस्कार सिर्फ वर्तमान के लिए नहीं आने वाली कई पीढियां के लिए होते हैं और वह परंपरा बन जाते हैं ।
आज धर्म के नाम पर सांप्रदायिकता,बबाल, दंगे फसाद, अराजकता, चंदा चोरी, भू माफिया गिरी और भी न जाने कितने निंदनीय कृत्य किए जा रहे हैं । क्या यही भारतीय संस्कृति और संस्कार है?
अब उन सो कॉल्ड गॉड फादर लोगों को भी सोचना चाहिए कि वह इस समाज को धर्म के नाम पर क्या देकर जाएंगे नैतिकता या अनैतिकता ????



