कांग्रेस संगठन में बड़ा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: खरगे युग का आखिरी सबसे बड़ा फेरबदल, आधा दर्जन राज्यों के प्रभारी और अध्यक्ष बदलेंगे

  • चुनावी राज्यों पर नजर: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में बड़े बदलाव की तैयारी
  • पंजाब में नया फॉर्मूला: जट सिख (राजा बराड़ और प्रताप सिंह बाजवा) के एकाधिकार को तोड़कर हिंदू या दलित चेहरे को कमान देने की मजबूरी
  • यूपी में सोशल इंजीनियरिंग: अजय राय, अविनाश पांडे और आराधना मिश्रा (तीनों अगड़ी जाति) के रहते दलितों को साधने के लिए बड़ा बदलाव तय
  • दिग्गजों की भूमिका बदलेगी: सचिन पायलट और मुकुल वासनिक जैसे बड़े नेताओं को मिल सकती है नए और बड़े राज्यों की जिम्मेदारी

नई दिल्ली। कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही कांग्रेस आलाकमान ने संगठन को धार देना शुरू कर दिया है। शिवकुमार की जगह बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस (KPCC) की कमान सौंपकर कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वह अब ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ेगी।

सूत्रों के मुताबिक, मल्लिकार्जुन खरगे के बतौर कांग्रेस अध्यक्ष कार्यकाल का यह आखिरी और सबसे बड़ा देशव्यापी फेरबदल होने जा रहा है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद आधा दर्जन से अधिक राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों को बदलने की लिस्ट फाइनल हो चुकी है।

कांग्रेस का सबसे बड़ा फोकस उन राज्यों पर है जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें पंजाब और उत्तर प्रदेश सबसे अहम हैं।

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भले ही बदलावों से इनकार कर रहे हों, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (राजा बराड़) और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा दोनों एक ही जाति (जट सिख) से आते हैं। जातीय संतुलन साधने के लिए कांग्रेस अब दो चेहरों पर दांव लगा सकती है:

  • विजय इंदर सिंगला: राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष और पंजाब में कांग्रेस का बड़ा ‘हिंदू चेहरा’।
  • चरणजीत सिंह चन्नी: पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद, जिन्हें दलित वोट बैंक को एकजुट करने के लिए आगे किया जा सकता है।

यूपी में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) के साथ मिलकर योगी सरकार के विजय रथ को रोकने की तैयारी में है। हालांकि, मौजूदा संगठन में प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, अध्यक्ष अजय राय और विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा तीनों अगड़ी जाति से हैं। दलित वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस प्रभारी या अध्यक्ष पद में से किसी एक पर दलित नेता को बिठाना तय माना जा रहा है।

विधानसभा चुनावों में करारी हार और कई नेताओं के मंत्री बनने के बाद संगठन में कई जगहें खाली हुई हैं, जिन्हें जल्द भरा जाएगा:

राज्यवर्तमान स्थिति / नेतासंभावित बदलाव / वजह
केरलसनी जोसेफ (अध्यक्ष)सरकार में मंत्री बनने के बाद नया अध्यक्ष तय।
महाराष्ट्ररमेश चेन्नीथला (प्रभारी)केरल सरकार में मंत्री बने, नया प्रभारी आएगा।
असमजितेंद्र सिंह (प्रभारी)चुनाव में हार के बाद इस्तीफा, नया चेहरा मिलेगा।
दिल्लीकाजी निजामुद्दीन (प्रभारी)उत्तराखंड चुनाव के चलते जिम्मेदारी से मुक्त हो सकते हैं।
हिमाचलरजनी पाटिल (प्रभारी)अगले साल होने वाले चुनाव से पहले छुट्टी संभव।
गुजरातमुकुल वासनिक (प्रभारी)किसी दूसरे बड़े राज्य में शिफ्ट किए जा सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस फेरबदल में छत्तीसगढ़ के प्रभारी सचिन पायलट के पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव हो सकता है। उन्हें छत्तीसगढ़ की जगह किसी चुनावी या राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बड़े राज्य की कमान सौंपी जा सकती है। वहीं, आंध्र प्रदेश के प्रभारी मणिकम टैगोर और राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की भूमिकाओं में भी फेरबदल की पूरी संभावना है।

गोवा में हाल ही में गिरीश चोडनकर को कमान सौंपने के बाद अब तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए नए प्रभारी की तलाश तेज हो गई है। साफ है कि कांग्रेस इस आखिरी बड़े फेरबदल के जरिए आगामी विधानसभा और सांगठनिक चुनौतियों के लिए अपनी सबसे मजबूत टीम मैदान में उतारने जा रही है।

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