बेगूसराय: दरिंदगी की इंतहा! पहले किया गैंगरेप… Private part में डाले लकड़ी और कारतूस…

जुबिली स्पेशल डेस्क
बिहार के बेगूसराय से सामने आई रूह कंपा देने वाली गैंगरेप की घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता के परखच्चे उड़ा दिए हैं। एक महिला के साथ पांच दरिंदों ने न केवल सामूहिक दुष्कर्म किया, बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में कारतूस (बुलेट) और लकड़ी के टुकड़े डाल दिए। लेकिन इस जघन्य अपराध से भी ज्यादा हैरान करने वाला रवैया पुलिस और स्थानीय सदर अस्पताल का रहा, जिन्होंने पीड़िता को दोहरी प्रताड़ना से गुजरने पर मजबूर किया।
अपराध से बड़ा सिस्टम का सरेंडर?
इस पूरे मामले में दो सबसे बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं जो बताते हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों हैं:
1. अस्पताल की बड़ी लापरवाही: 3 दिन भर्ती रही, पर ‘कारतूस’ नहीं दिखा?
पीड़िता को 12 जून को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 15 जून को डिस्चार्ज कर दिया गया। सवाल यह है कि डॉक्टरों ने तीन दिन तक क्या इलाज किया कि वे महिला के शरीर के भीतर मौजूद कारतूस और लकड़ी को नहीं ढूंढ पाए? घर जाकर जब दर्द असहनीय हुआ, तब जाकर यह भयानक सच सामने आया। यही नहीं, दोबारा अस्पताल पहुंचने पर गंभीर रूप से तड़पती महिला को न व्हीलचेयर मिली और न ही स्ट्रेचर। परिजन उसे अपने हाथों का सहारा देकर एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग ले जाते रहे।
2. पुलिसिया सुस्ती पर खुद उठे सवाल
घटना 11 जून की रात की है, लेकिन मामला तब गरमाया जब सोशल मीडिया और मीडिया में अस्पताल की लापरवाही उजागर हुई। अब सदर डीएसपी खुद मान रहे हैं कि अगर पुलिस स्तर पर लापरवाही हुई है, तो कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल वही है कि क्या इतने संवेदनशील मामले में भी पुलिस किसी बड़े दबाव का इंतजार कर रही थी?
एक्शन में प्रशासन, उठ रहे हैं गंभीर सवाल
मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस अधीक्षक (SP) मनीष के निर्देश पर सदर डीएसपी आनंद कुमार पांडे और डीएसपी-2 दुर्गा शक्ति भारी पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे। पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर फॉरेंसिक टीम को एक्टिव किया गया है।
बड़ा सवाल: जब देश में महिला सुरक्षा और संवेदनशील मामलों के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ और ‘त्वरित रिस्पॉन्स’ की बातें की जाती हैं, तब बिहार के एक जिला मुख्यालय के मुख्य अस्पताल और पुलिसिंग का यह रवैया नीति-निर्माताओं को आईना दिखाने के लिए काफी है। क्या आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उन डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरेगी जिन्होंने इस मामले को हल्के में लिया?



