अली ख़ामेनेई को अंतिम विदाई, लेकिन बेटे मोजतबा की गैरमौजूदगी ने खड़े किए सवाल

तेहरान: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में शुरू हो गई हैं। राजधानी तेहरान में रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में लाखों लोगों के पहुंचने का दावा किया गया, जबकि ईरानी सरकार का कहना है कि पूरे अंतिम संस्कार कार्यक्रम में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने इसे “सदी का अंतिम संस्कार” बताया है।

हालांकि इस पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा अली ख़ामेनेई के पुत्र और उनके उत्तराधिकारी माने जा रहे मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति को लेकर हो रही है। मार्च 2026 में सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मोजतबा सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने से उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।

तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अली ख़ामेनेई के अन्य तीन बेटे मसूद, मुस्तफ़ा और मैसम मौजूद रहे। इनके अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ, मुख्य न्यायाधीश घोलाम हुसैन मोहसनी एजेई, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी सहित सरकार और सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में 97 वर्षीय प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु जाफ़र सोभानी ने संपन्न कराईं। फिलहाल अली ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर ग्रैंड मोसल्ला परिसर में रखा गया है, जहां हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

मोजतबा ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल न होने से राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में उन्हें भी चोट लगी थी, जिसमें उनके पिता की मौत हुई थी। हालांकि ईरान की ओर से इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से भी मोजतबा सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हो सकते हैं, क्योंकि ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि इजराइल उन्हें भी निशाना बना सकता है।

ईरानी सरकार ने रविवार को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। अंतिम संस्कार का कार्यक्रम कई दिनों तक चलेगा। सोमवार को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद पार्थिव शरीर को मंगलवार को पवित्र शहर क़ोम ले जाया जाएगा। बुधवार को इराक के एक प्रमुख शिया धार्मिक स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा और अंत में गुरुवार को अली ख़ामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

बताया गया है कि अली ख़ामेनेई के ताबूत के साथ उनके चार रिश्तेदारों के ताबूत भी रखे गए हैं, जिनकी हालिया हमलों में मौत हुई थी। इनमें उनकी एक वर्षीय पोती ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी भी शामिल हैं।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप ने कहा कि अंतिम संस्कार के कारण ईरान के साथ शांति वार्ता एक सप्ताह के लिए टाल दी गई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के शीर्ष नेता एक ही स्थान पर मौजूद हैं और अमेरिका चाहे तो एक ही हमले में सभी को निशाना बना सकता है, लेकिन ऐसा नहीं करेगा क्योंकि फिर बातचीत के लिए कोई नहीं बचेगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें ईरानी जनता को रोते देखकर हैरानी हुई, क्योंकि उन्हें लगता था कि लोग अली ख़ामेनेई से नाराज थे। उन्होंने यहां तक कहा कि “हो सकता है ये नकली आँसू हों।”

ट्रंप के इस बयान पर शोकसभा में शामिल कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। एक महिला ने कहा कि उन्होंने अपने देश और अपने शहीदों के लिए वास्तविक आंसू बहाए हैं, न कि दिखावे के लिए।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। लोगों ने “अमेरिका मुर्दाबाद”, “इजराइल मुर्दाबाद” और “हम बदला लेंगे” जैसे नारे लगाए। कई प्रदर्शनकारी ऐसे बैनर लिए हुए थे जिन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भड़काऊ नारे लिखे थे।

एक कवि ने कार्यक्रम के दौरान ट्रंप के खिलाफ उग्र टिप्पणी भी की, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

ईरानी प्रशासन का दावा है कि केवल तेहरान में ही एक करोड़ से अधिक लोगों के जुटने की संभावना है। इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और भगदड़ से बचने की अपील की है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, तेज गर्मी के कारण हजारों लोगों को चिकित्सकीय सहायता देनी पड़ी। ग्रैंड मोसल्ला और आसपास के चिकित्सा केंद्रों में चार हजार से अधिक लोगों का इलाज किया गया। हालांकि अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।

अली ख़ामेनेई ने 1989 से अपनी मृत्यु तक ईरान के सुप्रीम लीडर के रूप में कार्य किया। उनके शासनकाल में ईरान ने पश्चिम, विशेषकर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उन्होंने गाजा में हमास, लेबनान में हिज्बुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों जैसे ईरान समर्थित समूहों का खुलकर समर्थन किया, जिसके कारण पश्चिमी देशों के साथ ईरान के संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे।

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