ट्रंप का वेनेजुएला और ईरान के बाद अब इस देश पर नजर? सैन्य कार्रवाई के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वेनेजुएला और ईरान के बाद अब क्यूबा भी अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि भविष्य में क्यूबा में अमेरिकी अभियान की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान के बाद अमेरिका-क्यूबा संबंधों और लैटिन अमेरिका में वॉशिंगटन की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios को दिए इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि क्या क्यूबा में संभावित अमेरिकी अभियान वेनेजुएला में की गई कार्रवाई जैसा हो सकता है। इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ट्रंप ने कहा कि क्यूबा अमेरिका के बेहद करीब है और वहां की परिस्थितियां अलग हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन होगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में क्यूबा पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाया है। अमेरिका की ओर से हवाना पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर क्यूबा ऐसे हथियार हासिल करने की कोशिश करता है जो अमेरिकी क्षेत्र या ग्वांतानामो बे स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

ट्रंप ने कहा कि अगर क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार कमजोर होती है या वहां राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो अमेरिका के पास कई सैन्य और कूटनीतिक विकल्प मौजूद हैं।

उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन ने संभावित राजनीतिक संकट और आंतरिक अशांति जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की है।

ट्रंप ने क्यूबा की संभावित कार्रवाई की तुलना ईरान अभियान से भी की। उन्होंने कहा कि ईरान में किया गया सैन्य अभियान काफी बड़ा था और उसमें ज्यादा संसाधनों का इस्तेमाल हुआ था।

उनके मुताबिक, क्यूबा का मामला अलग है क्योंकि उसकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ट्रंप की क्यूबा नीति वेनेजुएला मॉडल जैसी नजर आ रही है, जिसमें आर्थिक दबाव, कूटनीतिक दबाव और सैन्य विकल्पों का संकेत शामिल है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि क्यूबा और वेनेजुएला की परिस्थितियों में काफी अंतर है। क्यूबा की राजनीतिक व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध और अमेरिका से भौगोलिक नजदीकी इस मामले को अलग बनाते हैं।

क्यूबा को लेकर संभावित अमेरिकी कार्रवाई कब तक हो सकती है, इस पर ट्रंप ने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई। उन्होंने केवल कहा कि आगे के फैसले हालात के आधार पर लिए जाएंगे।

ट्रंप के इस बयान के बाद लैटिन अमेरिका में अमेरिका की विदेश नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञ अब यह देखने पर नजर रख रहे हैं कि वॉशिंगटन क्यूबा के खिलाफ केवल दबाव की रणनीति अपनाता है या कोई बड़ा कदम उठाता है।

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