मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले भारत को झटका? अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम

फ्रांस में आयोजित G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की संभावित मुलाकात से पहले अमेरिका ने एक अहम रणनीतिक फैसला लिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है।

यह कमांड हवाई स्थित है और इसकी जिम्मेदारी हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक फैले विशाल क्षेत्र की सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों की निगरानी करना है। इसी कमांड के तहत अमेरिकी नौसेना का सातवां बेड़ा (Seventh Fleet) भी आता है, जिसकी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भूमिका को लेकर भारत में लंबे समय से चर्चा होती रही है।

गौरतलब है कि 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। उस समय अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा था कि यह बदलाव हिंद और प्रशांत महासागरों के बढ़ते रणनीतिक महत्व तथा भारत की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखकर किया गया है।

तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा था कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इसलिए कमांड के नाम में “इंडो” शब्द जोड़ा गया था।

पेंटागन के अनुसार, यह कदम कमांड की ऐतिहासिक पहचान और विरासत को बहाल करने के लिए उठाया गया है। अमेरिका का कहना है कि नाम बदलने से कमांड के कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों या सैन्य तैनाती में कोई बदलाव नहीं होगा।

हालांकि, इस फैसले के समय को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत हो सकता है, जबकि कुछ इसे केवल प्रतीकात्मक बदलाव बता रहे हैं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच कई रणनीतिक और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा जारी है। हाल के महीनों में दोनों देशों के संबंधों को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगती रही हैं। हालांकि अभी तक अमेरिकी प्रशासन ने इस नाम परिवर्तन को भारत-अमेरिका संबंधों से जोड़कर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नाम बदलने के बावजूद कमांड का भौगोलिक दायरा और सैन्य जिम्मेदारियां पहले जैसी ही रहेंगी। यानी हिंद महासागर और भारत से जुड़े क्षेत्र अब भी इस कमांड की रणनीतिक जिम्मेदारी के दायरे में बने रहेंगे।

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