Maharashtra Politics: उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका! 9 में से 7 सांसद बागी, जानिए किन 8 कारणों से बढ़ी नाराजगी

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 9 में से 7 सांसदों के बागी होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद फिलहाल दिल्ली में हैं और आने वाले समय में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि सांसदों की यह नाराजगी अचानक नहीं उभरी है। पिछले कुछ वर्षों से संगठनात्मक चुनौतियां, चुनावी प्रदर्शन में गिरावट और राजनीतिक भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने असंतोष को लगातार बढ़ाया। आइए जानते हैं वे 8 बड़े कारण, जिनकी वजह से उद्धव ठाकरे के सांसद बगावत के रास्ते पर पहुंच गए।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद कई सांसदों को लगा कि पार्टी नेतृत्व हार के कारणों का गंभीर विश्लेषण नहीं कर रहा है। विपक्ष में रहने के कारण उनकी राजनीतिक भूमिका भी सीमित होती चली गई।

सांसदों को अपने क्षेत्रों में विकास कार्य कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। महायुति सरकार के पास संसाधनों और योजनाओं की शक्ति होने के कारण UBT सांसदों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा था, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो रही थी।

नगरपालिका, नगर पंचायत और जिला परिषद चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। कई इलाकों में पार्टी चौथे और पांचवें स्थान तक सिमट गई, जिससे नेताओं की चिंता बढ़ गई।

मुंबई शिवसेना का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, लेकिन हालिया चुनावी नतीजों ने पार्टी की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए। मजबूत संगठन और सांसदों की मौजूदगी के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिलने से सांसदों की चिंता बढ़ी।

कुछ सांसदों का मानना था कि उद्धव ठाकरे विपक्ष की भूमिका में अपेक्षित आक्रामकता नहीं दिखा पा रहे हैं। पार्टी के भीतर संवाद की कमी और भविष्य की रणनीति को लेकर स्पष्टता न होने से असंतोष बढ़ता गया।

कई सांसदों का मानना था कि एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत मामलों में सहयोग कर रहे थे। इससे धीरे-धीरे शिंदे गुट का प्रभाव बढ़ता गया।

14 जून को मातोश्री में हुई बैठक को इस पूरे घटनाक्रम का अहम मोड़ माना जा रहा है। चर्चा है कि बैठक में कम सांसद शामिल हुए और उद्धव ठाकरे के कथित बयान—”जिसे जाना है, वह जा सकता है”—ने पहले से नाराज नेताओं को और दूर कर दिया।

सांसदों को लगने लगा था कि 2029 का चुनाव केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता के दम पर नहीं जीता जा सकता। संगठन की कमजोर होती स्थिति और संसाधनों की कमी ने उन्हें नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों में ओमराजे निंबालकर, नागेश पाटील आष्टीकर, संजय उत्तमराव देशमुख, संजय (बंडू) जाधव, संजय दीना पाटिल, राजाभाऊ (पराग) वाजे और भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

यदि ये सभी सांसद आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। वहीं, इससे महाराष्ट्र में शिवसेना की राजनीति और महायुति-महाविकास अघाड़ी के समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

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