US Tariff on Indian Goods: अमेरिकी 10% टैरिफ के बीच भारत का 45% निर्यात सुरक्षित; जापान डील व GCC बने ढाल

अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत समेत 17 देशों के सामान पर ‘फॉरस्ड लेबर’ (Forced Labour) से निपटने के नाम पर लगाए गए 10% अतिरिक्त टैरिफ के बाद वैश्विक व्यापार में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का 45% हिस्सा नए सेक्शन 301 शुल्क के दायरे से बाहर है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है।

जुलाई 2026 के इस बड़े आर्थिक घटनाक्रम के बीच भारत अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए ‘द्विपक्षीय समझौतों’ और ‘आंतरिक सुधारों’ का सहारा ले रहा है।

अमेरिकी टैरिफ चुनौती का सामना करने के साथ-साथ विदेश नीति के मोर्चे पर भारत ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं:

  • भारत-जापान बड़ा समझौता: भारत जापान के साथ एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार और तकनीक ढांचे (Trade & Tech Framework) पर बातचीत को अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़ रहा है।
  • पश्चिम एशिया व्यापार गलियारा: मध्य पूर्व (West Asia) में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत अपने रणनीतिक व्यापारिक गलियारों (Trade Corridors) को सुरक्षित करने के प्रयासों में जुटा है।
  1. विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल: 17 जुलाई को समाप्त हफ्ते में भारत का फॉरेक्स रिजर्व (Foreign Exchange Reserve) 1.08 अरब डॉलर बढ़कर और मजबूत हुआ है।
  2. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का दबदबा: 2025 के अंत तक भारत में 2,100 से अधिक GCC स्थापित हो चुके थे। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 4,000 के पार पहुंच जाएगी, जो भारत को वैश्विक तकनीक और सेवा अर्थव्यवस्था का केंद्र बना रही है।
  3. GDP ग्रोथ रेट का अनुमान: डेलॉयट (Deloitte) के ताजा अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी विकास दर 6.5% से 6.8% के बीच रहने की उम्मीद है।
  • चुनौती (पारंपरिक क्षेत्र): अमेरिका के 10% टैरिफ का असर मुख्य रूप से निर्यात-आधारित श्रम-गहन उद्योगों पर पड़ सकता है—खासकर कपड़ा (Textile) और हस्तशिल्प (Handicraft) क्षेत्रों में रोजगार पर दबाव की संभावना है।
  • अवसर (तकनीक व सर्विस सेक्टर): GCC की लगातार बढ़ती संख्या से शहरी युवाओं के लिए आईटी, तकनीक, एनालिटिक्स और वित्त (Finance) क्षेत्र में उच्च-गुणवत्ता वाले नए अवसरों का सृजन हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि 45% निर्यात का टैरिफ से बाहर रहना एक बड़ा बफर (Buffer) प्रदान करता है, लेकिन शेष 55% हिस्से पर आने वाले असर के वास्तविक आंकड़े आगामी महीनों के व्यापार डेटा में दिखेंगे।

आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के रुख और भारत-जापान समझौते की प्रगति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

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