क्या राजनीतिक दल बनेगी CJP? जानिए जेपी-अन्ना आंदोलन जैसा इतिहास

नई दिल्ली। नीट (NEET) छात्र आंदोलन को जंतर-मंतर पर ऐतिहासिक मोड़ देने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) क्या अब एक औपचारिक राजनीतिक दल में बदलने जा रही है? शनिवार को सरकार और सीजेपी के बीच हुए समझौते के बाद से यह सवाल देश की सियासत और सोशल मीडिया पर सबसे तेज हो गया है।
सरकार के साथ हुए समझौते में एक अहम शर्त यह भी थी कि आंदोलन के दौरान छात्रों और सीजेपी नेताओं पर दर्ज सभी केस वापस लिए जाएंगे और भविष्य में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के जरिए सीजेपी अपने उस नए ‘कैडर’ को सुरक्षित और मजबूत कर रही है, जो इस पूरे आंदोलन की रीढ़ बना था।
दो हिस्सों में बंटा समर्थकों का वर्ग: ‘पार्टी बने या आंदोलनकारी मंच?’
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से लेकर सड़कों तक सीजेपी के साथ खड़े लाखों युवाओं के बीच अब दो तरह की विचारधाराएं देखने को मिल रही हैं:
- राजनीतिक पार्टी बनाने का पक्ष: युवाओं का बड़ा वर्ग चाहता है कि सीजेपी सिर्फ एक दबाव समूह (Pressure Group) बनकर न रहे, बल्कि एक पंजीकृत राजनीतिक दल बनकर सीधे चुनावी राजनीति में युवाओं का प्रतिनिधित्व करे।
- सक्रिय आंदोलन मंच का पक्ष: वहीं, कई वरिष्ठ समर्थकों का मानना है कि सीजेपी को किसी पार्टी के रूप में ढलने के बजाय बिना चुनावी महत्वाकांक्षा के निष्पक्ष ‘यूथ प्लेटफॉर्म’ के रूप में ही काम करते रहना चाहिए।
सीजेपी नेतृत्व ने भी स्पष्ट किया है कि वे एक ऐसा स्वतंत्र मंच देना चाहते हैं जहां युवा बिना किसी डर के अपनी आवाज उठा सकें। हालांकि, पार्टी गठन का फैसला बेहद सोच-समझकर लिया जाएगा।
इतिहास की कसौटी पर आंदोलनों से उपजी पार्टियां: सफलता और चुनौतियां
आंदोलन से राजनीतिक दल का सफर कितना चुनौतीपूर्ण होता है, इसे भारत के राजनीतिक इतिहास से आसानी से समझा जा सकता है:
- जेपी आंदोलन से ‘जनता पार्टी’ (1977): जेपी आंदोलन से बनी जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी को हराकर इतिहास रचा, लेकिन अंदरूनी कलह के कारण जल्द ही बिखर गई।
- अन्ना आंदोलन से ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP): ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ से निकली AAP ने दिल्ली और पंजाब में पूर्ण बहुमत की सरकारें बनाईं, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
- क्षेत्रीय आंदोलनों की बड़ी सफलताएं:
- JMM (झारखंड): अलग राज्य आंदोलन से उभरी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) आज भी राज्य की मुख्य सत्ताधारी पार्टी है।
- AGP (असम): घुसपैठ विरोधी आंदोलन से बनी असम गण परिषद (AGP) ने 1985 में सरकार बनाई, पर समय के साथ इसका दायरा सिमट गया।
- BRS (तेलंगाना): तेलंगाना राज्य आंदोलन से बनी ‘भारत राष्ट्र समिति’ ने एक दशक तक शासन किया, लेकिन 2023 के चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा।
- बहुजन आंदोलन से ‘BSP’: कांशीराम के दलित-बहुजन आंदोलन से निकली बीएसपी ने यूपी में 4 बार सरकार बनाई, हालांकि हाल के वर्षों में उसका जनाधार घटा है।
सीजेपी के सामने आगे का रास्ता
सीजेपी के नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना होगा कि क्या वे ‘अन्ना आंदोलन’ की राह पर चलकर सत्ता की राजनीति का हिस्सा बनेंगे या ‘जेपी आंदोलन’ की तरह एक सामाजिक/छात्र क्रांति का चेहरा बने रहेंगे।
सीजेपी का भविष्य पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपने सड़कों और डिजिटल स्पेस में बने विशाल कैडर को किस दिशा में ले जाती है।

