बिहार का सीमांचल और पाकिस्तान कनेक्शन… आखिर क्यों बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता?

बिहार के नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी जिले से दो युवकों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद अखलाक और मोहम्मद अरमान को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि वे पाकिस्तान स्थित नेटवर्क और एक पाकिस्तानी गैंगस्टर के संपर्क में थे तथा देशविरोधी गतिविधियों और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रच रहे थे।
दोनों आरोपी सीतामढ़ी के टकोर गांव के रहने वाले हैं। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से संपर्क
प्रारंभिक जांच के अनुसार, दोनों आरोपी इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से जुड़े राणा हसनैन उर्फ राणा हुसैन के संपर्क में थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, बातचीत कथित तौर पर ‘वन-टाइम’ ऑडियो कॉल के जरिए होती थी, जिसमें कॉल समाप्त होते ही रिकॉर्ड स्वतः डिलीट हो जाता था।
ऐसे काम करता है ऑनलाइन आतंकी नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
आमतौर पर उनकी कार्यप्रणाली इस प्रकार बताई जाती है:
- सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संपर्क करना।
- वैचारिक रूप से प्रभावित करने और भरोसा जीतने की कोशिश।
- छोटे-छोटे भुगतान के बदले पोस्टर, ग्रैफिटी या प्रचार संबंधी गतिविधियां कराना।
- संवेदनशील स्थानों की रेकी और स्थानीय जानकारी जुटवाना।
- आगे चलकर हथियार या अन्य संसाधन उपलब्ध कराना।
- हैंडलर्स के निर्देश पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिलाने की कोशिश।
क्यों अहम है सीतामढ़ी?
सीतामढ़ी नेपाल सीमा से सटा जिला है और भारत-नेपाल सीमा के कई हिस्सों में लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत आसान रहती है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार नेटवर्क फर्जी पहचान, लॉजिस्टिक्स और ट्रांजिट के लिए इस रूट का इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी वजह से इस इलाके में संदिग्ध गतिविधियों पर लंबे समय से विशेष निगरानी रखी जाती रही है।
क्या फिर सामने आ रहा है ‘बिहार मॉड्यूल’?
सीतामढ़ी से हुई गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह मामला पहले चर्चित रहे दरभंगा मॉड्यूल जैसा कोई नया नेटवर्क तो नहीं है।
वर्ष 2011 से 2013 के बीच दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर और आसपास के इलाकों से प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई संदिग्ध गिरफ्तार किए गए थे। उस समय इस नेटवर्क को ‘दरभंगा मॉड्यूल’ के नाम से जाना गया था।
कई बड़े धमाकों में आया था दरभंगा मॉड्यूल का नाम
जांच एजेंसियों के अनुसार, इंडियन मुजाहिदीन का नाम दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, वाराणसी समेत कई शहरों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की जांच में सामने आया था। संगठन के प्रमुख चेहरों में यासीन भटकल, रियाज भटकल, इकबाल भटकल और अब्दुल सुभान कुरैशी शामिल थे।
साल 2013 में यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद दरभंगा मॉड्यूल को लेकर कई अहम खुलासे हुए थे।
जांच कई पहलुओं पर जारी
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार दोनों युवक केवल ऑनलाइन संपर्क में थे या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा भी थे। उनके मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल ऑनलाइन संपर्क तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क सक्रिय है।



