कोरोना के इलाज की भारी कीमत! स्टेरॉयड से गलने लगीं हड्डियां, युवाओं तक पर पड़ा गंभीर असर

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के दौरान गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए गए स्टेरॉयड अब कई लोगों के लिए लंबे समय की गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के इलाज के दौरान जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले कई मरीजों में एवस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis-AVN) और हड्डियों के गलने जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। इसके कारण कई मरीजों को चलने-फिरने, बैठने और सामान्य जीवन जीने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार, एक 17 वर्षीय युवती, जिसे कोरोना के दौरान स्टेरॉयड दिए गए थे, अब इतनी गंभीर परेशानी से जूझ रही है कि वह सामान्य तरीके से बैठ भी नहीं पाती। जांच में पता चला कि उसके कूल्हे (Hip Joint) की हड्डी प्रभावित हो चुकी है और धीरे-धीरे गलने लगी है। दर्द इतना ज्यादा है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो गया है।

एक अन्य मामले में एक युवक की कमर से घुटने तक की नसों और मांसपेशियों पर गंभीर असर पड़ा है। लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने के बाद उसकी हड्डियों में रक्त प्रवाह प्रभावित हुआ, जिससे हड्डी का हिस्सा खराब होने लगा। अब वह सामान्य रूप से चल-फिर नहीं पा रहा और इलाज के लिए लगातार डॉक्टरों की निगरानी में है।

एवस्कुलर नेक्रोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें किसी हड्डी तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। रक्त की कमी के कारण हड्डी का ऊतक (Bone Tissue) धीरे-धीरे मरने लगता है और समय के साथ हड्डी कमजोर होकर टूटने या बैठ जाने लगती है। यह समस्या सबसे अधिक कूल्हे (Hip Joint) में देखी जाती है, हालांकि कंधे, घुटने और टखने भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गंभीर मरीजों में सूजन कम करने और फेफड़ों को बचाने के लिए डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) और मेथाइलप्रेडनिसोलोन (Methylprednisolone) जैसे स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि ये दवाएं जरूरत पड़ने पर जीवनरक्षक साबित होती हैं, लेकिन:

  • जरूरत से ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड लेना,
  • लंबे समय तक इनका इस्तेमाल,
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना,

हड्डियों तक रक्त पहुंचाने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है। इससे AVN का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के बाद यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • कूल्हे, घुटने या कंधे में लगातार दर्द
  • बैठने या उठने में परेशानी
  • चलते समय लंगड़ाना
  • सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई
  • धीरे-धीरे दर्द का बढ़ना

बीमारी की शुरुआती अवस्था में दवाओं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है। लेकिन यदि हड्डी ज्यादा खराब हो जाए तो हिप रिप्लेसमेंट (Hip Replacement Surgery) या अन्य सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेरॉयड केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। कोरोना के दौरान जिन मरीजों को लंबे समय तक स्टेरॉयड दिए गए थे और अब उन्हें जोड़ों में लगातार दर्द या चलने-फिरने में दिक्कत हो रही है, उन्हें समय रहते जांच करानी चाहिए। शुरुआती पहचान से बीमारी की गंभीरता को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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