2027 का रण: ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ और PDA के रथ पर सवार होकर यूपी फतह करने निकलेंगे अखिलेश यादव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव सत्ता में वापसी के लिए एक महा-अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। सितंबर 2026 से अखिलेश यादव पूरे प्रदेश में ‘समाजवादी PDA रथ यात्रा’ निकालने की तैयारी में हैं, जिसका लक्ष्य राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों को मथना है।

पार्टी इस यात्रा को ‘संविधान बचाओ, PDA बचाओ’ के बड़े नारे के साथ जमीन पर उतारेगी। इसके जरिए सपा का सीधा फोकस पिछड़े (P), दलित (D) और अल्पसंख्यक (A) वर्ग के मतदाताओं को अपने पाले में बनाए रखने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकने पर है।

  • सभी 403 सीटों पर नजर: यह यात्रा यूपी के सभी विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जिसे 2027 के चुनाव से पहले सपा का अब तक का सबसे बड़ा जनसंपर्क अभियान माना जा रहा है।
  • प्रमुख मुद्दे: यात्रा के दौरान सामाजिक न्याय, आरक्षण, जातिगत जनगणना और संविधान की सुरक्षा जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जाएगा।
  • धार्मिक शुरुआत की संभावना: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस रथ यात्रा की शुरुआत किसी बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल से हो सकती है, ताकि सामाजिक न्याय के संदेश के साथ एक सांस्कृतिक जुड़ाव भी बनाया जा सके।

इस बार समाजवादी पार्टी की रणनीति में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। अखिलेश यादव केवल पारंपरिक PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के भरोसे नहीं हैं, बल्कि वे ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पर भी आगे बढ़ रहे हैं।

ब्राह्मण वोट बैंक पर नजर: पिछले कुछ समय से अखिलेश यादव मंदिरों के दर्शन कर रहे हैं और सनातन व भगवान राम से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोल रहे हैं। राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद को मुखरता से उठाकर उन्होंने यह साफ संकेत दे दिए हैं कि सपा इस बार ब्राह्मण मतदाताओं के बीच भी पैठ बनाने की पूरी कोशिश में है।

2027 के इस चुनावी शंखनाद के जरिए अखिलेश यादव एक तरफ बीजेपी सरकार को सामाजिक न्याय के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ अपनी नई रणनीति से सूबे का सियासी समीकरण बदलने का माद्दा रख रहे हैं।

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