पाकिस्तान में आतंक की नई पाठशाला! AI और मार्शल आर्ट से तैयार किए जा रहे आतंकी?

पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की कथित नई रणनीति को लेकर बड़े दावे सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, संगठन अब सिर्फ हथियार चलाने की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को शारीरिक, तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जा रही है। हालांकि, इन दावों और सामने आए वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
राणा मोहम्मद अशफाक की भूमिका पर दावा
सूत्रों के अनुसार, भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल राणा मोहम्मद अशफाक इन कथित ट्रेनिंग कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। दावा है कि वह युवाओं को तैराकी समेत विशेष शारीरिक प्रशिक्षण दे रहा है, ताकि उन्हें पानी के रास्ते आने-जाने और कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाने के लिए तैयार किया जा सके।
कुछ कथित तस्वीरों और वीडियो में अशफाक को स्विमिंग पूल में तैराकी करते हुए देखा गया है। दावा किया जा रहा है कि यह व्यक्तिगत अभ्यास नहीं, बल्कि युवाओं के प्रशिक्षण का हिस्सा है।
मार्शल आर्ट और फिजिकल फिटनेस पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के बैनर तले पाकिस्तान के कई शहरों में कथित ट्रेनिंग कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इनमें युवाओं को जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, कुश्ती और अन्य शारीरिक अभ्यास कराए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य शारीरिक रूप से सक्षम और अनुशासित युवाओं की टीम तैयार करना बताया जा रहा है।
महिलाओं को AI और डिजिटल स्किल्स की ट्रेनिंग देने का दावा
दावों के अनुसार, इन कथित कैंपों में महिला प्रतिभागियों को स्किल डेवलपमेंट के नाम पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टूल्स और नई तकनीकों की जानकारी भी दी जा रही है।
एक कथित वीडियो में राणा मोहम्मद अशफाक यह कहते हुए दिखाई देता है कि विरोधी तकनीक के मामले में आगे हैं, इसलिए आधुनिक तकनीक सीखना जरूरी है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आतंकी संगठन पारंपरिक आतंकवाद के साथ-साथ तकनीक, साइबर और सूचना युद्ध की दिशा में भी अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ऐसी ट्रेनिंग का इस्तेमाल भविष्य में घुसपैठ, साइबर हमलों, सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने और अन्य तकनीक आधारित गतिविधियों में किया जा सकता है।
स्वतंत्र पुष्टि नहीं
फिलहाल, इन कथित वीडियो और दावों की किसी स्वतंत्र या आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें सत्यापित तथ्य के बजाय सूत्रों के हवाले से सामने आए दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। सुरक्षा एजेंसियां इन इनपुट्स का विश्लेषण कर रही हैं और संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर नजर बनाए हुए हैं।



