सोनम वांगचुक के अनशन से राहुल गांधी दूर क्यों? विपक्षी समर्थन के बीच कांग्रेस की चुप्पी पर उठे सवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 18वें दिन भी जारी है। लंबे अनशन के चलते उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस बीच कई विपक्षी नेताओं ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की है, लेकिन सोनम वांगचुक ने अभी तक अपना आंदोलन खत्म करने का संकेत नहीं दिया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन में वांगचुक के शामिल होने के बाद अब इसकी तुलना 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन से भी की जा रही है। हालांकि, इस बार विपक्षी राजनीति का रुख पहले से अलग नजर आ रहा है।

सोनम वांगचुक के आंदोलन को कई विपक्षी दलों का समर्थन मिल चुका है, लेकिन कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अब तक सीधे तौर पर जंतर-मंतर नहीं पहुंचे हैं। इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

वांगचुक ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर विपक्षी दल, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है, युवाओं से जुड़े इस आंदोलन का समर्थन नहीं करते हैं तो यह उनकी संकीर्ण सोच को दिखाएगा।

हालांकि कांग्रेस का कहना है कि वह पहले से ही पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दे को उठा रही है।

कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति का आंदोलन और छात्रों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग के साथ खड़ी है।

वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रदर्शनकारियों के नाम एक पत्र लिखकर कहा कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा टूटना युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सोनम वांगचुक के आंदोलन को आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और वाम दलों के नेताओं का समर्थन मिला है।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी से भी अपील की कि वह जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि जो लोग युवाओं के भविष्य पर भरोसा रखते हैं, उन्हें इस आंदोलन के साथ खड़ा होना चाहिए।

2011 में भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान तत्कालीन विपक्षी दल बीजेपी ने खुलकर समर्थन किया था। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार ज्यादा सतर्क रुख अपना रही है, क्योंकि अन्ना आंदोलन के बाद पैदा हुए राजनीतिक माहौल का असर 2014 के लोकसभा चुनावों पर भी पड़ा था।

आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, 28 जून से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलो कम हो गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और राहुल गांधी इस आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

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