ट्रंप का बड़ा एलान, 30 सितंबर तक इराक पूरी तरह खाली करेगी अमेरिकी सेना

वॉशिंगटन। वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने व्हाइट हाउस में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह ऐतिहासिक एलान किया है कि 30 सितंबर 2026 तक अमेरिकी सेना पूरी तरह से इराक छोड़ देगी। इसके साथ ही साल 2003 में शुरू हुई अमेरिकी सेना की 23 साल पुरानी मौजूदगी का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा।

इस सैन्य वापसी को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने जो नया रुख अपनाया है, वह बेहद दिलचस्प है। ट्रंप के मुताबिक, अब दोनों देशों के संबंध केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे।

  • तेल और ऊर्जा: अमेरिका अब इराक के साथ तेल (Oil) और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर साझेदारी करेगा।
  • व्यापारिक निवेश: इराकी पीएम अली अल-जायदी ने भी पुष्टि की है कि सेना भले ही जा रही हो, लेकिन अमेरिकी कंपनियां इराक में निवेश और कारोबार पहले की तरह ही जारी रखेंगी।
  • इमरजेंसी सपोर्ट: ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में इराक को जरूरत पड़ी, तो अमेरिका मदद के लिए आगे आएगा, लेकिन वहां स्थायी सैन्य ठिकाने अब इतिहास की बात हो जाएंगे।

2024 के गुप्त समझौते का हिस्सा: पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) के अनुसार, यह बड़ी वापसी साल 2024 में दोनों देशों के बीच हुए उस ऐतिहासिक समझौते के तहत हो रही है, जिसमें इस्लामिक स्टेट (IS) विरोधी सैन्य मिशन को समाप्त करने की बात कही गई थी।

अमेरिकी सेना की इराक में एंट्री और एग्जिट की कहानी बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है:

  • 2003 (हमला और कब्जा): मार्च 2003 में अमेरिका ने तत्कालीन इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के पास ‘तबाही के हथियार’ होने का दावा कर हमला किया था (जो बाद में कभी नहीं मिले)। 2007 तक वहां अमेरिकी सैनिकों की संख्या 1.70 लाख पार कर गई थी।
  • 2011 (पहली आंशिक वापसी): ओबामा प्रशासन के दौरान लड़ाकू सैनिकों की वापसी हुई।
  • 2014 (ISIS का खतरा और दोबारा एंट्री): जब इस्लामिक स्टेट (IS) ने इराक और सीरिया पर कब्जा जमाया, तो इराक की गुहार पर अमेरिकी सेना दोबारा लौटी।
  • 2021 से 2026 (सफाई अभियान): पिछले दो सालों से केवल 2,500 सैनिक ही इराकी सेना को ट्रेनिंग देने के लिए वहां तैनात थे, जो अब 30 सितंबर तक पूरी तरह विदा हो जाएंगे।

अमेरिकी सेना ने पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी इराकी सुरक्षा बलों को सौंप दी है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सेना के जाने के बाद इराक में क्षेत्रीय शक्तियों (जैसे ईरान) का प्रभाव बढ़ सकता है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका के इस ‘एग्जिट प्लान’ के बाद मिडिल ईस्ट की राजनीति क्या नया मोड़ लेती है।

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